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विश्वकप फ़ुटबॉल 2010 दक्षिण अफ़्रीका में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वर्ष 2010 के विश्व कप फ़ुटबॉल की मेज़बानी दक्षिण अफ़्रीका को मिल गई है. शनिवार को इस बात के फ़ैसले के लिए हुए मतदान में दक्षिण अफ़्रीका ने मोरक्को से बाज़ी मार ली. ज़्यूरिख़ में जब इस फ़ैसले की घोषणा फ़ीफ़ा अध्यक्ष सेप ब्लैटर ने की तो दक्षिण अफ़्रीका के प्रतिनिधिमंडल में ख़ुशी की लहर दौड़ गई. इस प्रतिनिधिमंडल में दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला भी मौजूद थे. मतदान से पहले ही दक्षिण अफ़्रीका इसका प्रबल दावेदार माना जा रहा था और मतदान में मोरक्को को 14-10 के मतदान से हराकर वह ये अधिकार जीतने वाला पहला अफ़्रीकी देश बन गया है. माना जा रहा है कि इस निर्णय के बाद दक्षिण अफ़्रीकियों को थोड़ी तसल्ली हुई होगी क्योंकि 2006 के विश्व कप के आयोजन के लिए हुए मतदान में वह जर्मनी से सिर्फ़ एक वोट से हार गया था. शनिवार को हुए इस मतदान से पहले ही लीबिया को दौड़ से बाहर कर दिया गया था जबकि मिस्र को एक भी मत नहीं मिला. ब्लैटर ने इस फ़ैसले की घोषणा करते हुए कहा कि इससे पूरे महाद्वीप की जीत हुई है. मोरक्को इस तरह लगातार चौथी बार इस दौड़ में हार गया है. अगर मोरक्को को ये अधिकार मिलता तो वह ऐसा करने वाला पहला अरब देश बनता. लीबिया को बाहर इसलिए कर दिया गया क्योंकि वह ट्यूनीशिया के साथ मिलकर संयुक्त मेज़बानी की बात कर रहा था मगर ट्यूनीशिया ने आख़िरी मौके पर नाम वापस ले लिया था. |
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