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खिलाड़ी भागे, टीम ख़त्म | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान की फ़ुटबॉल टीम को भंग कर दिया गया है. हुआ यह कि टीम मैच खेलने इटली गई और फिर देखते ही देखते टीम के नौ खिलाड़ी लापता हो गए. बाद में उनमें से कई खिलाड़ी जर्मनी और नीदरलैंड में शरण लेने के लिए सामने आए. अफ़ग़ानिस्तान के फ़ुटबॉल परिसंघ के एक प्रवक्ता ने कहा कि दौरा छोड़ ग़ायब हो गए खिलाड़ियों ने देश का अपमान किया है. इटली में टीम को कई मैच खेलने थे. बीस साल में पहली बार हो रहे इस यूरोप दौरे का उद्देश्य था अफ़ग़ानिस्तान की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पैसा जुटाना. वेरोना में खिलाड़ियों के ग़ायब होने के बाद आसपास के इलाक़े में भी पुलिस को सतर्क कर दिया गया, लेकिन उन्हें पकड़ा नहीं जा सका. टीम के कोच मीर अली असगर अकबरज़ोला ने इटली की एक समाचार एजेंसी को बताया, "हमारी राष्ट्रीय टीम 20 साल बाद यूरोप में खेलने आई थी. हमारे देशवासियों में आशा के संचार के लिए फ़ुटबॉल की ज़रूरत है." अफ़ग़ान फ़ुटबॉल परिसंघ के अनुसार उसने बिल्कुल नए खिलाड़ियों की टीम तैयार करने का प्रयास किया था. फ़ुटबॉल अफ़ग़ानों में बहुत लोकप्रिय रहा है, लेकिन तालेबान शासन के दौरान 1996 से 2001 के बीच खिलाड़ियों को पूरा शरीर ढंकने वाली जर्सी पहन कर ही खेलने की अनुमति थी. कई बार हाफ़-टाइम के समय दर्शकों को नमाज़ पढ़ने के लिए बाध्य किया जाता था. तालेबान शासन के दौरान कई बार काबुल के स्टेडियम में मैच के बाद दर्शकों के सामने कथित अपराधियों को सजा भी दी जा चुकी है. |
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