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'माराडोना के लिए आख़िरी मौक़ा' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अर्जेंटीना के स्टार फ़ुटबॉल खिलाड़ी डिएगो माराडोना को नशे की लत छुड़ाने वाले क्लिनिक में दाख़िल कराने के बाद उनके डॉक्टरों का कहना है कि यह उनकी ज़िंदगी बचाने का आख़िरी मौक़ा है. 43 वर्षीय माराडोना पिछले महीने से दो बार गंभीर हालत में ह्रदय की बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती कराए जा चुके हैं. माराडोना को साँस लेने में भी मुश्किलें आ रहीं हैं और उनका ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ है. पहली बार उन्हें राजधानी ब्यूनस ऑयर्स के एक अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष में 10 दिनों तक रखा गया. उसके बाद ऐसा लगा कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई. और तो और उन्हें इसके बाद गोल्फ़ के मैदान पर भी देखा गया लेकिन उनकी हालत फिर बिगड़ गई और उन्हें दोबारा अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. जीवन शैली दरअसल डॉक्टरों की सलाह के बावजूद माराडोना ने अपनी जीवन शैली नहीं बदली और अपना खाना-पीना पहले की तरह जारी रखा. उनकी आदतों के कारण माराडोना की पूर्व पत्नी और उनकी दो बेटियों ने उन्हें नशे की लत छुड़ाने वाले एक क्लिनक में दाख़िल करने को मंज़ूरी दे दी. हालाँकि उन्होंने माराडोना की राय लिए बिना ही ऐसा किया. क्लिनिक के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए डॉक्टर अल्फ़्रेडो काहे ने कहा, "यहाँ माराडोना को कुछ समय तक रहना होगा. माराडोना को ख़ुद ही अपनी आदतों से छुटकारा पाना होगा. अभी तक उन्होंने ऐसा नहीं किया है." चार साल पहले माराडोना को ह्रदय की बीमारी हुई थी. डॉक्टरों का कहना था कि कोकीन ज़्यादा लेने के कारण उनकी ऐसी हालत हुई. |
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