वाईफाई का इस्तेमाल पड़ोसी कर रहे हों तो?

वाई फ़ाई

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क्या आपके घर के ब्रॉडबैंड का डेटा लिमिटिड समय से पहले ख़त्म हो जाता है?

क्या यूट्यूब पर वीडियो को बफर होने में कुछ ज़्यादा ही समय लगता है?

कहीं ऐसा तो नहीं कि आपके वाईफाई को कोई आस पड़ोस में इस्तेमाल कर रहा है?

आपके डेटा सर्विस के लिए तो ये चीज़ें नुकसानदेह तो हैं ही, ये आपको क़ानूनी परेशानी में भी डाल सकती हैं.

जिनकी भी ब्रॉडबैंड की स्पीड बहुत बढ़िया है, उनके लिए ऐसी परेशानी खड़ी हो सकती है क्योंकि लोग ऐसी मुफ्त ब्रॉडबैंड सर्विस के पासवर्ड जुगाड़ने की कोशिश में लगे रहते हैं.

अगर आपको शक है कि कोई आपके वाईफाई से अपनी डिवाइस कनेक्ट कर रहा है तो उसको इसके बारे में पता लगाना चाहिए और ये पता लगाया जा सकता है.

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ब्राउज़र के एड्रेस बार में “192.168.1.1” टाइप कीजिए और उसके बाद अपने एडमिन पेज पर चले जाइए. वहां पर आपको 'डीएचसीपी क्लाइंट लिस्ट' लिखा हुआ दिखाई देगा.

वहां पर जो भी डिवाइस आपके वाई फाई से कनेक्टेड है वो दिखाई दे जाएगा. हर डिवाइस का अलग नाम होता है इसलिए अपनी डिवाइस को पहचानना आसान होगा.

अपने राऊटर के डिफ़ॉल्ट लॉग इन और पासवर्ड को बदल दीजिए. ये पासवर्ड सभी को पता होता है इसलिए ये सबसे पहला काम होना चाहिए. पासवर्ड बदलने के बाद सभी डिवाइस में भी नया पासवर्ड डालना पड़ेगा.

राऊटर का नाम बदल कर पड़ोसियों के लिए अपने राऊटर की पहचान को भी मुश्किल किया जा सकता है. वायरलेस सेटिंग मेनू में सर्विस सेट आइडेंटिफायर यानी एसएसआईडी मिलेगा जहां से इसको बदला जा सकता है.

राऊटर की सिक्योरिटी सेटिंग में WPA2 को चुनिए क्योंकि इसका एन्क्रिप्शन सबसे बढ़िया है. 2006 के बाद बने सभी राऊटर में ये फ़ीचर मिल जाएगा.