स्मार्टफोन कंपनियों को चाहिए आपसे आइडिया

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कंपनियों के पास स्मार्टफोन में बेचने वाले फीचर के आइडिया अब शायद ख़त्म हो गए हैं. इसलिए वो अब आपसे आइडिया की तालाश में हैं. एक के बाद एक कंपनियां अब लोगों से ये आइडिया ढूंढ रही हैं.

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कई कंपनियां अब ऐसा ही कर रही हैं. इससे नए प्रोडक्ट पर उनका खर्च कम हो रहा है

चीन की स्मार्टफोन कंपनी ज़ेडटीइ ने हाल में इसकी घोषणा की है. <link type="page"><caption> गिज़्मोडो </caption><url href="http://www.gizmodo.in/indiamodo/ZTE-to-launch-its-crowdsourced-smartphone-next-year/articleshow/53543974.cms" platform="highweb"/></link>की खबर के अनुसार लोगों के सुझावों के लिए एक वेबसाइट बनाई गई है जहां नए स्मार्टफोन के लिए वो अपनी बात कह सकते हैं. ज़ेडटीइ को ये आइडिया आपसे तुरंत चाहिए क्योंकि उसकी कोशिश है कि इस स्मार्टफोन को वो अगले साल लॉन्च कर दे. ये सुझाव सिर्फ स्मार्टफोन के लिए मांगे जा रहे हैं.
कंपनी के अनुसार जिसके भी सुझाव को सबसे ज़्यादा पसंद किया जाएगा उसे कैश इनाम दिया जाएगा.

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लेकिन ज़ेडटीइ ऐसा करने वाली पहली कंपनी नहीं है.<link type="page"><caption> इस खबर</caption><url href="http://www.androidauthority.com/official-pepsi-crowdsourcing-smartphone-656703" platform="highweb"/></link> के अनुसार कुछ इसी तरह से पेप्सी ने भी स्मार्टफोन लॉन्च करने का मन बनाया था. लेकिन अभी उसके बारे में और जानकारी नहीं आयी है.
जब भी कोई कंपनी ऐसे लोगों से आइडिया मांगती है तो उसे क्राउडसोर्सिंग कहा जाता है. हो सकता है कि आपको लाखों लोग से कुछ ख़ास जानकारी न मिले लेकिन उनमें से जो 10-20 आइडिया होंगे वो काफी काम के हो सकते हैं. भारत जैसे देश में, जहां 100 करोड़ मोबाइल फ़ोन इस्तेमाल करने वाले लोग हैं और करीब 40 करोड़ मोबाइल इंटरनेट, ऐसी जानकारी लेना काफी काम की चीज़ हो सकती है.

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मोबाइल फ़ोन से जुड़े आइडिया पर क्राउडसोर्सिंग के बारे में<link type="page"><caption> हुआवेई </caption><url href="http://pr.huawei.com/en/news/hw-327762-ict.htm" platform="highweb"/></link>ने भी कुछ समय पहले घोषणा की थी.

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लोगों से ये पूछना कि वो क्या चाहते हैं, कंपनियों के लिए उनके प्रोडक्ट बनाने के काम को आसान कर देता है. लोगों के मन को भांपने के अलावा ये किसी भी प्रोडक्ट को बनाने का खर्च काफी कम कर देता है. अगर लाखों ग्राहक ही आपको बता दें कि वो क्या चाहते हैं तो उससे बढ़िया भला क्या हो सकता है.
भारत जैसे बड़े बाजार के लिए कंपनियां कम खर्च पर प्रोडक्ट तैयार कर लेंगी तो, थोड़े बदलाव करके, उसे ही अफ्रीका और दक्षिण अमरीका के देशों में बेचना आसान हो जाएगा. इसलिए भी कंपनियां नए प्रोडक्ट बनाने के लिए ये रास्ता अपना रही हैं.
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