पर्यावरण बन सकता है कैंसर की वजह

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- Author, जेम्स गैलेघर
- पदनाम, स्वास्थ्य संपादक, बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट
नब्बे फ़ीसदी कैंसर के मामले पर्यावरण और आदतों की देन है.
अमरीका में एक शोध में पाया गया है कि कोशिकाओं में बदलाव मुश्किल से ही कैंसर में बदलते हैं जब तक कि ज़हरीले केमिकल या रेडिएशन उसमें शामिल न हों.
शोध पत्रिका नेचर में छपे स्टडी के बाद कैंसर के बचाव की रणनीति को फिर से तैयार किया जा सकता है.
इसने पुराने उन अध्ययनों को चुनौती दी है जिनमें कहा गया था कि ज़्यादातर कैंसर कोशिकाओं में बदलाव का नतीजा होते हैं.

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साल की शुरुआत में कुछ शोधकर्ताओं ने यह कहकर एक नई बहस शुरू कर दी थी कि दो तिहाई क़िस्म के कैंसर धूम्रपान जैसी वजहों की बजाय दुर्भाग्य का नतीजा होते हैं.
नई तहक़ीक़ात में कैंसर को चार नज़रियों से समझने की कोशिश हुई है. शोधकर्ताओं का दावा है कि केवल 10-30 फ़ीसदी मामलों में ही प्राकृतिक शारीरिक कारणों या 'भाग्य' कैंसर की वजह हो सकता है.

विशेषज्ञ नई शोध से ख़ासे सहमत दिखाई दे रहे हैं.
ताज़ा शोध के दौरान शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडलिंग, जनसंख्या आंकड़े और आनुवांशिक ढर्रे का शोध में इस्तेमाल किया.
शोध परिणामों में लगातार पता चला कि कैंसर के पीछे 70 से 90 फ़ीसदी कारण बाहरी थे.
स्टोनी ब्रूक के निदेशक डॉ. यूसुफ़ हानून ने बीबीसी को बताया, ''कैंसर के लिए बाहरी कारण बड़ी भूमिका निभाते हैं. लोग इसे दुर्भाग्य कहकर नज़रंदाज़ नहीं कर सकते.''

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वह इसे यूं समझाते हैं, ''यह नहीं कह सकते कि वो धूम्रपान नहीं करते पर बदकिस्मती से कैंसर हो गया. यह रिवॉल्वर की तरह है और आंतरिक कारण सिर्फ़ एक गोली है.. धूम्रपान करने वाला इस रिवॉल्वर में दो-तीन गोलियां भर देता है और फिर दाग देता है. इसमें किस्मत की भूमिका हो सकती है क्योंकि हर धूम्रपान करने वाले को कैंसर नहीं होता, पर वो अपनी मुश्किल ज़रूर बढ़ा लेते हैं. हम चाहते हैं कि जितना हो सके इस रिवॉल्वर से गोलियां निकाल दी जाएं.''
हालांकि अभी भी पूरी तरह बाहरी ख़तरों की पहचान नहीं हो पाई है और न ही सभी ख़तरों से बचा जा सकता है.

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ओपन यूनिवर्सिटी में एप्लाइड स्टेटिस्टिक्स के प्रोफ़ेसर केविन मैककॉनवे के मुताबिक़, ''उनका यह मानना सही लगता है कि बाहरी कारणों का कैंसर में बड़ा योगदान है लेकिन फिर भी यह नहीं कहा जा सकता कि इन बाहरी कारणों के असर में होने के बावजूद किसी को कैंसर होगा ही. मगर इस शोध से इतना ज़रूर हुआ है कि हमें सिर्फ़ किस्मत के बजाय कुछ और चीज़ों पर भी ग़ौर करना चाहिए.''
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