दिल बचाने के लिए 'सभी को चाहिए दवा'

हर्ट अटैक
इमेज कैप्शन, पचास साल की उम्र के बाद अगर स्टेटिंस दी जाए तो हर्ट अटैक से बचा जा सकता है.

शोध से पता चला है कि अगर कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवा स्टेटिंस सभी स्वस्थ्य व्यक्ति को दी जाए तो हजारों लोगों को दिल के दौरे से बचाया जा सकता है.

लैंसेट में प्रकाशित शोध के अनुसार पौने दो लाख रोगियों पर किए गए शोध से पता चला है कि कम खतरे वाले रोगियों को भी स्टेटिंस दवा से काफी लाभ हुआ है.

ऑक्सफोर्ड के शोधकर्ताओं का कहना है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) को स्वस्थ्य व्यक्तियों को भी स्टेटिंस की दवा दिए जाने का सुझाव देना चाहिए.

एनएचएस की औषधियों पर नजर रखनेवाली संस्था- नाईस (नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड क्लिनिकल एक्सलेंस, एनआईसीई), इसके लिए सबूतों का आकलन कर रही है.

वैसे स्टेटिंस दवा के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि इसका बुरा असर भी पड़ता है क्योंकि इसके प्रयोग से किडनी खराब हो सकती है.

इंग्लैंड में डॉक्टर स्टेटिंस की दवा लेने के लिए सबसे अधिक सुझाव देते हैं. इसके बारे में लंबे समय से माना जाता रहा है कि यह दवा लेने से दिल का दौरा नहीं पड़ता.

असरकारी दवा

ऑक्सफोर्ड विश्वविधालय के शोधकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने इसकी जांच-पड़ताल की है.

स्टेटिंस से हर्ट अटैक में तो लाभ हो सकता है, लेकिन इसका किडनी पर असर पड़ता है.
इमेज कैप्शन, स्टेटिंस से हर्ट अटैक में तो लाभ हो सकता है, लेकिन इसका किडनी पर असर पड़ता है.

इसके लिए 27 रोगियों पर किए गए प्रयोग से पता चला है कि स्टैटिंस के प्रयोग से हर्ट अटैक में काफी कमी आई है.

नाइस के मौजूदा नियमों के अनुसार जिन लोगों में दस साल में हृदय रोग होने के लक्षण हो सकते हैं, उनमें से 20 फीसदी लोगों को स्टैटिंस दिए जाने पर सहमति है.

इसके लिए डॉक्टर मरीजों की उम्र के साथ-साथ ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल की मात्रा और लाईफ स्टाइल भी देखते हैं.

कोलेस्ट्रॉल हों कम

इस शोध में लगे एक शोधार्थी प्रोफेसर कॉलिन बैगेंट ने बीबीसी को बताया, “हमें कई वर्षों से बताया गया है कि कोलेस्ट्रॉल की अधिक मात्रा खतरे की निशानी है, इसलिए कोलेस्ट्रॉल की मात्रा हमेशा कम होनी चाहिए. लेकिन असली बात ये है कि कोलेस्ट्रॉल जितना भी हो, उसे और कम करने की जरूरत है.”

अब प्रोफेसर कॉलिन बैगेंट और उनके अन्य सहयोगियों को नाइस ने उपलब्ध प्रमाण का समीक्षा करने को कहा है जिससे कि भविष्य में और ज्यादा लोगों को स्टेटिंस दिया जा सके.

इंग्लैंड और वेल्स के लिए दवा नीति बनाने वाले नाइस का कहना है कि वह दिशा-निर्देश की समीक्षा कर रहा है.

यह शोध रिपोर्ट 2013 के अंत तक प्रकाशित होगा.

किडनी पर 'बुरा असर'

हालांकि एक सवाल जो अधूरा रह जाएगा वह उसके चलते पड़ने वाले बुरे प्रभाव का है.

स्टेटिंस के बारे में कहा जाता है कि इससे किडनी को नुकसान पहुंचता है, किडनी खराब हो सकती है, नसें कमजोर हो सकती हैं और मधुमेह की बीमारी भी हो सकती है.

लंदन स्कूल ऑफ हाइजिन एंड ट्रॉपिकल मेडीसिन के प्रोफेसर शाह इब्राहिम ने पिछले साल इनके सबूतों का आकलन किया था.

प्रोफेसर शाह ने चेतावनी देते हुए डॉक्टरों को सलाह दी थी कि इस दवा का इस्तेमाल स्वस्थ लोगों पर न करें.

हालांकि अब वे कहते हैं, “इस शोध से इसका प्रमाण मिलता है कि स्टेटिंस से उन लोगों को भी लाभ हो सकता है जिनमें किडनी और मधुमेह जैसी बीमारियों की थोड़ी-बहुत आशंका होती है. वैसे लोगों में स्टेटिंस की दवा से दिल के दौरे के खतरे को कम किया जा सकता है.”

उनका सुझाव है कि दुनिया में पचास साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए यह बेहतर दवा है, क्योंकि पचास साल के उम्र के 83 फीसदी लोगों के बारे में माना जाता है कि अगले दस साल में हृदय रोग की बीमारी हो सकती है.

प्रोफेसर शाह के अनुसार, “पचास साल से उपर के उम्र वालों को स्टेटिंस देने का लाभ यह है कि एनएचएस का भविष्य में दिल के दौरे पर होने वाले खर्च का पैसा बचेगा.”

हालांकि चिंतित होकर यह जरूर पूछते हैं कि क्या यह मुनासिब होगा कि सभी लोगों को ताउम्र दवा दी जाती रहे.