स्तनपान करने वाले बच्चे ज़्यादा बेहतर

दूध पिलाती मां
इमेज कैप्शन, इससे पहले भी कई शोध बता चुके हैं कि मां का दूध बच्चों के लिए बहुत फ़ायदेमंद है.

ब्रिटेन में ऑक्सफ़र्ड विश्वविधालय के शोधकर्ताओं के अनुसार कम से कम चार महीनों तक स्तनपान करने वाले बच्चों में बाद में किसी प्रकार की व्यवहारवादी समस्या पैदा होने की संभावना कम होती है.

शोधकर्ताओं ने स्तनपान से संबधित आंकड़े उस वक़्त जमा किए जब बच्चे सिर्फ़ नौ महीने के थे और फिर जब वे पांच साल के हो गए तो उन बच्चों के माता-पिता को एक प्रश्नावली दी जिसमें ज्यादातर सवाल बच्चों से संबंधित थे.

शोधकर्ताओं ने पहले जमा किए गए आंकड़े और माता-पिता के ज़रिए दिए गए जवाबों का तुलनात्मक अध्ययन किया.

बीबीसी के स्वास्थ्य संवाददाता जेन ड्रेपर के अनुसार शोधकर्ताओं ने इसके लिए ब्रिटेन के साढ़े नौ हज़ार से भी ज़्यादा परिवारों का अध्ययन किया.

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि पांच साल की उम्र में बेचैन या चिंतित रहने के लक्षण बोतल से दूध पीने वाले बच्चों के मुक़ाबले उन बच्चों में कम थे जिन्होंने कम से कम चार महीने तक स्तनपान किया था.

अंग्रेज़ी जर्नल आर्काइव्स ऑफ़ डिज़ीज़ इन चाइल्डहुड में प्रकाशित एक लेख में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इस तथ्य को मानने के बावजूद कि स्तनपान कराने वाली महिलाएं ज्यादा उम्रदराज़ और अधिक पढ़ी लिखी होती हैं, ज़्यादा दिनों तक स्तनपान करने वाले बच्चों में किसी भी व्यवहार संबंधी समस्या की संभावना तीस फ़ीसदी कम होती है.

शोधकर्ताओं के अनुसार ऐसा माना जाता है कि या तो मां के दूध में कुछ ऐसी चीज़ें होती हैं जिससे बच्चों का दिमाग़ तेज़ी से विकसित होता है या फिर स्तनपान के समय मां से बहुत क़रीब होने का उन्हें फ़ायदा होता है.

लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ़ मिडवाइव्स का कहना है कि इस अध्ययन से स्तनपान के फ़ायदे का सबूत मिलता है लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि जो माताएं बोतल से अपने बच्चों को दूध पिलाती हैं उन्हें क़सूरवार ठहराया जाए.