कोविड वैक्सीनः क्या है कोरोना के टीके का ड्राई रन?

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- Author, प्रवीण शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
भारत ने कोविड-19 की वैक्सीन लगाए जाने की मुहिम शुरू करने से पहले की तैयारियां चालू कर दी हैं.
इसके तहत देश के चार राज्यों- असम, आंध्र प्रदेश, गुजरात और पंजाब में कोविड-19 वैक्सीन का ड्राई रन सोमवार, 28 दिसंबर से शुरू कर दिया गया है. ये ड्राई रन दो दिन चलाया जाना है.
आंध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले, गुजरात में राजकोट और गांधीनगर, पंजाब में लुधियाना और शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) और असम के सोनितपुर और नलबाड़ी में ये मुहिम चलाई जा रही है.
को-विन प्लेटफ़ॉर्म पर होंगे रजिस्ट्रेशन
इन राज्यों के तयशुदा केंद्रों पर लोगों को इस वैक्सीन की डोज़ देने की मॉक ड्रिल शुरू की गई है.
इसके लाभार्थियों का को-विन आईटी प्लेटफ़ॉर्म पर रजिस्ट्रेशन किया गया था और सोमवार को मैसेज के ज़रिए इन्हें कोविड-19 वैक्सीनेशन के लिए वक़्त और जगह के बारे में बताया गया.
इस ड्राई रन के लिए एक विस्तृत चेक लिस्ट केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तैयार की है और इसे इन राज्यों के साथ साझा किया गया है.
गुजरात में मंगलवार से फ़ील्ड विज़िट्स शुरू कर दी गई है. जबकि सोमवार से राजकोट ज़िले, राजकोट शहर, गांधीनगर ज़िले और गांधीनगर शहर में ड्राई रन शुरू कर दिया गया था.
सोमवार को हर जगह तक़रीबन 25 लोगों का इस को-विन प्लेटफ़ॉर्म पर रजिस्ट्रेशन करके देखा गया है. मंगलवार को इन चारों राज्यों में वैक्सीनेशन के ड्राई रन का दूसरा दिन है.
जनवरी से भारत में कोविड-19 वैक्सीन को लगाए जाने की मुहिम शुरू होने की उम्मीद है.
इसे लॉन्च करने से पहले ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रक्रियाओं का परीक्षण करने के लिए इस ड्राई रन को चलाया जा रहा है.
सोमवार की एक्सरसाइज़ में वॉलंटियर्स का मॉक रजिस्ट्रेशन शामिल था. इसके बाद इन्हें वैक्सीनेशन ड्रिल के लिए बुलाया गया.
वर्कशॉप और रजिस्ट्रेशन
ड्राई रन शुरू करने से पहले सोमवार को वैक्सीनेशन के काम में लगने वाले कर्मचारियों के लिए एक स्पेशल ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित की गई.
इसके अलावा, को-विन ऐप की भी जाँच-परख की गई कि यह ऐप ठीक से काम कर रहा है या नहीं.
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ पब्लिक हेल्थ (आईआईपीएच), गांधीनगर में एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉक्टर अनीश सिन्हा यूएनडीपी और डब्ल्यूएचओ में वैक्सीन और इम्यूनाइज़ेशन पर काम कर चुके हैं.
डॉक्टर सिन्हा बताते हैं कि दो-तीन महीने पहले जब कई कंपनियों के कोरोना वैक्सीन के ट्रायल्स एडवांस स्टेज में पहुँच गए थे, तभी तक़रीबन यह साफ़ हो गया था कि अब एक वैक्सीन आने वाली है और इसके लिए मैनपावर की ट्रेनिंग, कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर और इसके ट्रांसपोर्टेशन की चुनौतियों पर काम करने की ज़रूरत है.
वे कहते हैं, "इन चीज़ों पर काम शुरू किया गया. हमारे पास वैक्सीनेशन के लिए पहले से कोल्ड स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद हैं. देश में तक़रीबन 28000-29000 कोल्ड चेन पॉइंट्स का इंफ्रा है जो कि ज़रूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है."
डॉक्टर सिन्हा कहते हैं कि कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी जा चुकी है और अब इन तैयारियों को जाँचने-परखने की ज़रूरत थी क्योंकि वैक्सीन कभी भी आ सकती है.
इस ड्राई रन के ज़रिए वैक्सीनेशन के काम में लगने वाले कर्मचारियों की तैनाती, कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्थाओं, ट्रांसपोर्टेशन के काम और दूसरे इंतज़ामों का भी परीक्षण किया जा रहा है ताकि जब वास्तविक वैक्सीनेशन शुरू हो तब किसी तरह की दिक़्क़त न आए.
इसके साथ ही इस वैक्सीनेशन के लिए किस तरह के प्रोटोकॉल्स रहेंगे और इनका कैसे पालन होना है, इसका भी परीक्षण किया जा रहा है.
इस दो दिन के ड्राई रन का प्रस्ताव केंद्र सरकार ने दिया था. इस ड्राई रन के नतीजे केंद्र के स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ साझा किए जाएंगे.
डॉक्टर सिन्हा कहते हैं, "पूरी योजना ये है कि वैक्सीनेशन को लॉन्च करने से पहले इसकी पूरी व्यवस्थाओं और दूसरे पहलुओं को जाँच लिया जाए ताकि बाद में इसे लेकर दिक्क़तें ना आएं."
क्या है ड्राई रन?
यह एक रिहर्सल की तरह है. इसमें कोविड-19 वैक्सीन आने के बाद इसे किस तरह से लगाया जाना है? इसकी क्या तैयारियां होनी हैं? इन तमाम चीज़ों का परीक्षण किया जाना है.
इसके ज़रिए यह भी देखा जाएगा कि वैक्सीनेशन के दौरान क्या-क्या अड़चनें आ रही हैं और उन्हें किस तरह से दूर किया जाना चाहिए. इसे मॉक ड्रिल भी कहा जा रहा है.
मौजूदा टारगेट 30 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाने का है. सबसे पहले हेल्थकेयर वर्कर्स को यह वैक्सीन लगाई जानी है.
इसके बाद 50 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों और उसके बाद पहले से दूसरी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को यह वैक्सीन लगाई जानी है.
राज्यों में इसे लेकर डेटाबेस बन रहे हैं. लोगों का रजिस्ट्रेशन होगा और फिर उन्हें मैसेज भेजकर वैक्सीन लगाने की तारीख़, वक़्त और सेंटर की जानकारी दी जाएगी.
ट्रांसपोर्टेशन के लिए पहले राज्य और फिर वहां से क्षेत्रों और ज़िला मुख्यालयों और फिर स्वास्थ्य केंद्रों तक इन्हें पहुँचाया जाना है.
को-विन नाम से एक आईटी प्लेटफ़ॉर्म तैयार किया गया है. इसी प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए वैक्सीन लगाने का पूरा काम अंजाम दिया जाएगा.
डॉ. सिन्हा कहते हैं कि दो दिन में पूरे होने वाले इस मॉक ड्रिल का पूरा ब्योरा और आंकड़े केंद्र को भेजे जाएंगे.
वे कहते हैं, "अभी तक जो जानकारी है उस हिसाब से इस मॉक ड्रिल में कोई दिक्क़त नहीं आई है."
वैक्सीनेशन के इस ड्राई रन में वास्तविक वैक्सीन का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा. वैक्सीन को छोड़कर इससे जुड़ी पूरी प्रक्रियाओं का वास्तविक आधार पर परीक्षण किया जाएगा.
कैसे होगा लोगों का रजिस्ट्रेशन?
कोरोना की वैक्सीन जिन्हें दी जानी है पहले उनका रजिस्ट्रेशन को-विन प्लेटफ़ॉर्म पर होगा. को-विन एक वेबसाइट और ऐप दोनों की शक्ल में रहेगा.
जिन लोगों को सबसे पहले ये वैक्सीन लगाई जानी है उनका डेटा हर राज्य में तक़रीबन तैयार है. रजिस्ट्रेशन में एक मोबाइल नंबर और एक फ़ोटो आईडी ज़रूरी होगा. आईडी में कई विकल्प दिए जा रहे हैं.
इस मॉक ड्रिल में लाभार्थियों का को-विन एप पर रजिस्ट्रेशन कराया जा रहा है. इसके ज़रिए इस एप में रजिस्ट्रेशन के दौरान कहीं कोई दिक्क़त न आए इन चीज़ों को देखा जा रहा है.
वैक्सीनेशन के बाद इसी ऐप पर सर्टिफिकेट भी जनरेट हो जाएगा. इसके अलावा, ड्राई रन में वैक्सीनेशन कहां किया जाएगा और इन सेंटरों को कैसे चिह्नित किया जाएगा, इसकी भी पड़ताल हो रही है.
इस ड्रिल के ज़रिए वैक्सीनेशन करने की पूरी प्रक्रियाओं को जाँचा और परखा जा रहा है.
सेंटर कैसे होंगे?
जिन सेंटरों में वैक्सीन लगाई जानी है उनमें तीन कमरे होंगे. पहला कमरा वेटिंग रूम होगा जहां वैरिफ़िकेशन की प्रक्रिया होगी.
दूसरे कमरे में वैक्सीन लगाई जाएगी और तीसरा कमरा ऑब्ज़र्वेशन रूम होगा जहां वैक्सीन लगने के बाद लाभार्थी को कुछ देर रुकना होगा ताकि किसी तरह की दिक्क़त होने पर चिकित्सकीय सहायता दी जा सके.
वैक्सीनेशन के काम के लिए हर साइट सेंटर पर पाँच लोग रहेंगे.
क्या पहले भी हुए हैं ऐसे ड्राई रन?
कोरोना वैक्सीन के लिए हो रहे मौजूदा मॉक ड्रिल को प्रिपेयर्डनेस असेसमेंट कहा जा सकता है.
डॉ. सिन्हा कहते हैं, "दो-तीन साल पहले पूरे भारत में मीजल्स-रूबेला वैक्सीन कैंपेन हुआ था. उसमें 9 महीने से 10 साल तक के बच्चों को यह वैक्सीन दी गई थी. यह पूरी आबादी का तक़रीबन 25 फ़ीसद बैठती है."
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