कोरोना वैक्सीन: भारत में बन रहे टीके में नेपाल ने दिखाई दिलचस्पी

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भारत में कोरोना वायरस वैक्सीन का परीक्षण अंतिम चरण में पहुंच चुका है, वैक्सीन का उत्पादन भी तेज़ी से हो रहा है.
भारत सरकार ने कहा है कि टीकाकरण एक महीने में शुरू हो सकता है.
उधर, नेपाल ने भी अपनी वैक्सीन की जरूरतों को पूरा करने की पहल शुरू कर दी है, और भारत में बन रही वैक्सीन में रुचि दिखाई है.
भारत में नेपाल के राजदूत नीलांबर आचार्य ने बीबीसी को बताया कि वैक्सीन को लेकर उन्होंने भारत में वैक्सीन निर्माताओं और सरकारी अधिकारियों के साथ दिल्ली में चर्चा की.
पश्चिमी देशों में टीकाकरण की शुरुआत के बाद से नेपाल में चर्चा तेज़ है कि वहां वैक्सीन की आपूर्ति कैसी की जाएगी.

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राजदूत आचार्य ने भारत में एक वैक्सीन निर्माता, सीरम इंस्टीट्यूट के एक वरिष्ठ अधिकारी और भारत के नीति आयोग के प्रमुख अभिताभ कांत के साथ बातचीत की.
सीरम इंस्टीट्यूट कंपनी एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित वैक्सीन का उत्पादन कर रहा है.
इस टीके को 70 से 90 प्रतिशत तक प्रभावी बताया गया है.
आचार्य ने कहा, "सीरम इंस्टीट्यूट की क्षमता बहुत बड़ी है. यह नेपाल की जरूरतों को भी पूरा कर सकता है. हम इस संबंध में सीरम इंस्टीट्यूट के साथ बातचीत कर रहे हैं. उनसे बातचीत उम्मीदों के मुताबिक रही है."

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भारत से कितनी वैक्सीन आएगी?
पिछले महीने नेपाल की यात्रा के दौरान, भारतीय विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने कहा कि नेपाल की वैक्सीन की ज़रूरत भारत के लिए प्राथमिकता होगी.
आचार्य ने मुताबिक अभिताभ कांत ने भी नेपाल को वैक्सीन में प्राथमिकता देने का ज़िक्र किया है.
आचार्य के मुताबिक़ नेपाल शुरू में अपनी 20 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन देने की कोशिश करेगा.
ये दो चरणों में होगा, पहले चरण में तीन प्रतिशत और दूसरे चरण में 17 प्रतिशत लोगों को टीका दिया जाएगा.
उनके मुताबिक, "इसका मतलब है कि लगभग 60 लाख यानी एक करोड़ 20 लाख वैक्सीन. हमें उम्मीद है कि हमारी प्रारंभिक जरूरतों को भारत से पूरा किया सकेगा. यह सब एक साथ नहीं होगा, एक बार उत्पादन शुरू होने के बाद स्थिति साफ़ होगी."

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भारत की वैक्सीन नेपाल के लिए उपयोगी क्यों?
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत या पड़ोस के देश मे बने टीके कई कारणों से नेपाल के लिए फायदेमंद हो सकते हैं, ख़ासकर भारत में बनाए गए टीके क्योंकि ये टीके सस्ते और आपूर्ति के लिहाज़ से आसान होंगे."
जानकार डॉक्टर समीर मणि दीक्षित के मुताबिक, "नेपाल को वैक्सीन के लिए बहुत दूर नहीं जाना पड़ेगा. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी-एस्ट्रेजेनेका वैक्सीन का निर्माण भारत में सीरम इंस्टीट्यूट में किया जा रहा है. दोनों खुराक की कीमत लगभग 1,500 रुपये है."
उन्होंने कहा कि वैक्सीन सस्ते हैं और और सामान्य कोल्ड चेन का इस्तेमाल कर इन्हें सुरक्षित रखा जा सकता है. दीक्षित के मुताबिक चीन में बनने वाले टीके भी नेपाल के लिए फायदेमंद हो सकते हैं.
भारत में कौन से टीके अंतिम चरण में?
भारत के सीरम इंस्टीट्यूट की एस्ट्राजेनेका कोवशील्ड वैक्सीन अंतिम परीक्षण के दौर से गुजर रही है और इसके "आपातकालीन उपयोग" के लिए भारत सरकार से अनुमति मांगी गई है.

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हैदराबाद स्थित कंपनी भारत बायोटेक भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के सहयोग से कोवैक्सीन नाम की वैक्सीन बना रही है, जो अभी क्लिनिकल ट्रायल के तीसरे चरण में है.
इसके आपातकाल इस्तेमाल के लिए भी मंज़ूरी मांगी गई है.
तीसरे चरण में कैडिलैक हेल्थकेयर की ज़ायकोव-डी वैक्सीन और रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-फाइव का भी परीक्षण किया जा रहा है.
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