कोरोना वायरस: 'फ़ेक न्यूज़ फैलाई, फिर ख़ुद को पुलिस के हवाले कर दिया'

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- Author, जो टाइडी
- पदनाम, साइबर-सिक्योरिटी रिपोर्टर
माइकल लेन ब्रैन्डिन को लग रहा था कि उनकी फ़ेसबुक पोस्ट हलचल मचा देगी. लेकिन उन्हें शायद ही इसका अंदाज़ा था कि इसकी वजह से वह गिरफ़्तार हो जाएंगे, नौकरी गंवा बैठेंगे और ऐसे मुक़दमे में फंस जाएंगे, जो उन्हें जेल की सलाख़ों के पीछे भेज सकता है.
मार्च की वो दोपहर वैसे भी थोड़ी सुस्त थी. उस दिन माइकल की पूरी टाइमलाइन कोविड-19 फैलने की स्थिति में इसका सामना करने के तरीक़ों पर बहस से भरी पड़ी थी.
लिहाज़ा, माइकल ने अपने शब्दों के मुताबिक़ 'सोशल एक्सपेरिमेंट' को अंजाम देने का फ़ैसला किया. ब्रैन्डिन ने फ़ेसबुक पर एक पोस्ट डाली. इसमें उन्होंने दावा किया कि वह कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं. उन्होंने लिखा कि डॉक्टरों ने उन्हें कहा है कि कोरोना वायरस हवा के ज़रिये फैलता है.
इसका मतलब यह कि आपकी ओर खांसने और छींकने वाले लोगों की तुलना में आप हवा के ज़रिये इस वायरस के ज्यादा आसान शिकार हो सकते हैं.
लेकिन यह ब्रैन्डिन की अपनी गढ़ी हुई कहानी थी.
ब्रैन्डिन कहते हैं कि वह यह दिखाना चाहते थे कि ऑनलाइन पढ़ी जाने वाली हर चीज़ पर आप हमेशा यक़ीन नहीं कर सकते.
कोरोना वायरस के बारे में फ़ेसबुक पोस्ट डालते ही ब्रैन्डिन को सहानुभूति मिलने लगी. कुछ लोग यह पढ़ कर सदमे में थे. कई लोगों ने इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी थीं.
ब्रैन्डिन ने कहा, "मेरे कई दोस्तों ने मुझे मैसेज कर मेरी खैरियत पूछी. लेकिन मैंने उन्हें बताया कि जो कुछ भी मैंने अपने पोस्ट में लिखा, वह फेक था."
इधर, ब्रैन्डिन अपने ऑनलाइन दोस्तों को परेशान करने वाले इस सच का खुलासा कर रहे थे, उधर इस पोस्ट ने ऑफ़लाइन दुनिया में खलबली मचा दी थी. उनकी फ़ेक न्यूज टेक्सास की टाइलर काउंटी में जंगल की आग की तरह फैल गई. ब्रैन्डिन यहीं रहते हैं.
यह मामला लॉकडाउन लागू होने से थोड़े ही दिन पहले का था, लेकिन लोग बेहद चिंतित हो उठे थे और स्थानीय अस्पतालों में फ़ेन कर इस खबर की सच्चाई पूछने लगे थे.
लोग यह जानना चाह रहे थे हवा से फैलने वाले इस अदृश्य प्राणघातक वायरस से वे खुद को आख़िर बचाएं तो कैसे?

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गिरफ़्तारी का वारंट
जल्द ही टाइलर काउंटी के शेरिफ़ दफ्तर को कोरोना वायरस की इस फ़र्जी ख़बर से फैली घबराहट का पता चल लग गया.
पुलिस ने ब्रैन्डिन से संपर्क साधा और उन्हें तुरंत अपना फ़ेसबुक पोस्ट ठीक करने के लिए कहा. ब्रैन्डिन ने बग़ैर देर किए इसे ठीक कर दिया. लेकिन तब तक फ़ेक न्यूज से अफ़वाह पूरे सोशल मीडिया में फैल चुकी थी.
अब अगली फेसबुक पोस्ट डालने की बारी पुलिस की थी. काउंटी शेरिफ ने फ़ेसबुक फॉलोअर्स को साफ-साफ बता दिया कि झूठी ख़बर फैलाने के आरोप में 23 साल के ब्रैन्डिन पर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है.
ब्रैन्डिन पर झूठी खबर फैलाने का आरोप लगाया गया. पुलिस के मुताबिक़ उन्होंने ऐसी ख़बर फैलाई, जिसका कोई आधार नहीं था.
अफरातफरी फैला देने वाली इस पोस्ट के बाद पुलिस और मेडिकल अफ़सरों को तुरंत कार्रवाई करनी पड़ी. इस बीच, ब्रैन्डिन ने खुद को अधिकारियों के हवाले कर दिया.
ब्रैन्डिन ने कहा, "मुझे उन लोगों (अधिकारियों) ने कहा कि आपको पूरी रात जेल में गुज़ारनी होगी, क्योंकि, जज तो अगले दिन सुबह ही आएंगे. इससे मैं बेहद चिंतित हो गया."
एक रात जेल की कोठरी में बंद रहे ब्रैन्डिन को आखिर 1000 डॉलर (800 पाउंड) के मुचलके पर रिहा कर दिया गया और अब वह अपना मुकदमा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं.

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ब्रैन्डिन कहते हैं, "मैंने मास-कम्यूनिकेशन में बीएससी की डिग्री ली है. मैंने फ़ैक फ़ेसबुक पोस्ट यह साबित करने के लिए डाली थी कि कोई भी इस तरह के पोस्ट डाल कर किस कदर दहशत फैला सकता है."
"मैं यह बताना चाहता था कि लोग जो कुछ भी पढ़ते हैं या सुनते हैं, उसे सच न मान लें. ऐसी किसी भी चीज़ की सच्चाई जानने के लिए ज्यादा जानकारी जुटाना और अपना रिसर्च करना अहम है. लेकिन इस तरह की फ़ेक फ़ेसबुक पोस्ट डालने की वजह से मुझे अपनी नौकरी गंवानी पड़ी. मुझे हेल्थ बेनिफिट्स से महरूम कर दिया गया और पैसे न होने की वजह से मैं अपनी मास्टर डिग्री की पढ़ाई वक्त पर शुरू नहीं कर सका."
ब्रैन्डिन के मुताबिक़ इस घटना ने उनके पूरे परिवार पर आर्थिक बोझ डाल दिया है. क्योंकि सब मिल कर उनका खर्च उठाने की कोशिश कर रहे हैं.

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ग्लोबल 'इन्फोमेडिक'
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि कोरोना वायरस को लेकर ऑनलाइन सूचनाओं की बाढ़ यानी 'इन्फोमेडिक' की स्थिति है.
दुनिया भर की सरकारों और दूसरी एजेंसियों के सामने इस वैश्विक महामारी के बारे में फैल रही झूठी ख़बरों और इससे पैदा होने वाली दहशत को रोकने की बड़ी ज़िम्मेदारी पैदा हो गई है. उनके लिए यह दांव अब बहुत बड़ा हो गया है.
लिहाज़ा पूरी दुनिया में अब कोरोना वायरस से जुड़ी झूठी खबरें पोस्ट करना दंडनीय अपराध बना दिया गया है. ऐसा करने पर आपको जेल की हवा खानी पड़ सकती है.
बीबीसी मॉनिटरिंग की रिसर्च बताती है कि भारत, मोरक्को, थाईलैंड, कंबोडिया, सोमालिया, इथियोपिया, सिंगापुर, बोत्सवाना, रूस, दक्षिण अफ्रीका और कीनिया में कोरोना वायरस की झूठी ख़बरें फैलाने के आरोप में कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं.
कीनिया के रॉबर्ट अलाई ने हाल में मोम्बासा में कोरोना वायरस फैलने की झूठी ख़बर फैलाई थी. 41 साल के अलाई ने ट्विटर पर एक पोस्ट डाल कर लिखा था कि उन्होंने मोम्बासा में कोरोना वायरस फैलने की खबर सुनी है.
अलाई को इस तरह की झूठी ख़बर फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. फिलहाल उन्हें जमानत मिल गई है. लेकिन इस फर्जी ट्वीट के लिए अलाई को दस साल जेल में रहने की सजा मिल सकती है.
कीनियाई सरकार ने लोगों से लगातार यह अपील की है कि वे कोरोना वायरस के बारे में झूठी सूचनाएं और अफ़वाह न फैलाएं. ऐसा करने पर उन्हें कड़ी सज़ा दी जा सकती है.
यही वजह है कि अलाई को कीनिया का साइबर क्राइम कानून तोड़ने का आरोपी बनाया गया है. हालांकि अलाई ने इस बात से इनकार किया है कि वह लोगों को गुमराह करना चाहते थे या इस बारे में कोई फ़ेक न्यूज फैलाना चाहते थे.
गिरफ्तारी के बाद जेल भेजे जाने के बाद वह यह देख कर दंग थे कि उन्हें ऐसी जगह ले जाकर ठूंस दिया गया है, जहां कैदियों के बीच दो मीटर का भी फ़ासला नहीं है.
अलाई ने कहा, "मैं यह नहीं कह रहा हूं कि पुलिस लोगों को गिरफ्तार न करे. पुलिस का अपनी ड्यूटी निभाना बेहद अहम है. लेकिन उसे उन्हीं लोगों को पकड़ना चाहिए जो वास्तव में दोषी हैं. "

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