कोरोना वायरस जानवरों के लिए कितना घातक हो सकता है?

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- Author, भूमिका राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
इंसानों के बाद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से जानवरों के कोविड 19 पॉज़ीटिव होने की भी ख़बरें हैं. अमूमन जानवरों और पक्षियों में कोरोना वायरस मौजूद होता है लेकिन ये उन्हें नुक़सान नहीं करता और सामान्य परिस्थितियों में ये इंसानों में भी प्रवेश नहीं करता.
हॉन्ग कॉन्ग में एक कुत्ते और बेल्जियम में एक बिल्ली को कोविड 19 पॉज़ीटिव पाया गया. ये सबसे शुरुआती मामले थे जब जानवरों में कोविड 19 की पुष्टि हुई थी. इन दोनों ही मामलों के संदर्भ में कहा गया कि इनके मालिकों में कोरोना वायरस के लक्षण थे और संभव है कि जानवरों को कोविड 19 इसी वजह से हुआ हो.
न्यूयॉर्क में ही 23 अप्रैल को दो पालतू बिल्लियों में भी कोरोना वायरस संक्रमण पाया गया है. बिल्लियों के संक्रमण की वजह भी उनके मालिकों को ही माना जा रहा है.
जानवरों में संक्रमण का सबसे अधिक चौंकाने वाला मामला तब सामने आया जब न्यूयॉर्क के ब्रॉन्क्स चिड़ियाघर में एक बाघिन कोविड 19 पॉज़ीटिव पाई गई. अब उसी चिड़ियाघर में कुछ अन्य जानवरों के भी मामले सामने आए हैं.
नेशनल जियोग्राफ़िक वेबसाइट के मुताबिक़, ब्रॉन्क्स चिड़ियाघर में सात और जानवर (शेर-बाघ) पॉज़ीटिव पाए गए हैं. नेशनल जियोग्राफ़िक की वेबसाइट के मुताबिक़, चार बाघ और तीन शेर में संक्रमण पाया गया है.
ये सात नए केस, ब्रॉन्क्स चिड़ियाघर की बाघिन का मामला सामने आने के तीन हफ़्ते बाद सामने आए हैं. जिस बाघिन में कोविड 19 का पहला मामला पाया गया था, उसका नाम नादिया है.
वेबसाइट ने ब्रॉन्क्स चिड़ियाघर के मुख्य पशु चिकित्सक पॉल कैले के हवाले से लिखा है कि नादिया का केस किसी चिड़ियाघर में मौजूद बड़े मांसाहारी जीव में कोविड 19 का पहला ज्ञात मामला है.
नादिया में भी संक्रमण के लक्षण वही थे जो आम तौर पर इंसानों के लिए बताए गए हैं. माना जा रहा है कि नादिया को ये संक्रमण उसके देखभाल करने वाले से मिला.

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ब्रॉन्क्स चिड़ियाघर 16 मार्च से बंद है. चिड़ियाघर ने नादिया की रिपोर्ट दूसरे चिड़ियाघर के अधिकारियों के साथ भी शेयर की है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा सावधानी बरती जा सके.
लेकिन ब्रॉन्क्स चिड़ियाघर में नादिया का मामला सामने आने के बाद से ही दुनिया भर के देशों ने अपने यहां एहियात और सतर्कता बढ़ा दी है. ज़्यादातर देशों में सावधानी बरतते हुए चिड़ियाघरों को बंद कर दिया गया है.
भारत में लॉकडाउन के चलते यूं भी हर सार्वजनिक जगहें बंद है लेकिन पांच अप्रैल को नादिया (बाघिन) का टेस्ट पॉज़ीटिव आने के बाद छह अप्रैल को भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत आने वाले केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने भी कुछ जरूरी सावधानियां जारी की हैं.
इस अधिसूचना में देश में मौजूद सभी चिड़ियाघरों को अधिक से अधिक सतर्क रहने, जानवरों की 24 घंटे निगरानी करने, कोई भी असामान्य व्यवहार दिखने पर सीसीटीवी कैमरे का इस्तेमाल करने, देखभाल करने वालों के लिए पीपीई की अनिवार्यता, कमज़ोर और बीमार जानवर को क्वारंटीन करने और जानवरों से कम से कम संपर्क करनेके दिशा-निर्देश दिए गए है.
इस अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि मांसाहारी स्तनधारियों विशेष रूप से बिल्ली की प्रजाति के जीवों, उदबिलाव और चिंपैन्ज़ी पर ख़ास नज़र रखी जाए. यह भी निर्देश दिया गया है कि किसी भी तरह की आशंका नज़र आने पर जानवर के सैंपल को तुरंत टेस्ट करने के लिए भेजा जाए.

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चिड़ियाघर में काम करने वाले हर शख़्स के लिए कोरोना वायरस संक्रमण से दूर रहने और उसके प्रसार को रोकने के लिए भारत सरकार ने जिन गाइड-लाइन्स को जारी किया है उसका पालन करना अनिवार्य बताया गया है.
इस अधिसूचना के ही आधार पर आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर (उप्र) (ICAR-Indin veterinary research institute) के डायरेक्टर डॉ. आर के सिंह द्वारा देश के सभी चिड़ियाघरों के लिए सूचीबद्ध सावधानियां जारी की गई हैं.

सावधानियां....
- चिड़ियाघर के प्रवेश और निकास द्वार से गुज़रने वाले हर वाहन को डिस-इंफ़ेक्टेड किया जाए.
- चिड़ियाघर में जो भी कर्मचारी आए उसे अपने हाथों को चिड़ियाघर में प्रवेश के पहले ही सैनेटाइज़ करना होगा. खाने के बंद पैकेट को 65% एथेनॉल/मेथेनॉल से स्प्रे करना होगा. जो सब्ज़ियां लायी जाएं उन्हें अच्छी तरह धोना होगा.
- चिड़ियाघर में प्रवेश करने वाले हर शख़्स की थर्मल जांच की जाएगी. साथ ही उस शख़्स में संक्रमण के कोई लक्षण पाए जाते हैं या फिर उसके घर-परिवार में कोई संक्रमित मिलता है तो उसे घर पर ही रहने को कहा जाएगा.
- जानवरों की देखभाल करने वालों के लिए मुहैया कराए गए डांगरी, गमबूट, फ़ेसमास्क, हेड कवर और सेनेटाइज़र का इस्तेमाल करना अनिवार्य होगा.
- चिड़ियाघर परिसर के भीतर गला साफ़ करना, थूकना, पेशाब करना या फिर नाक साफ़ करने की सख़्त मनाही है.
- चिड़ियाघर के भीतर किसी भी अन्य बाहरी शख़्स की गतिविधि पर रोक.
- जानवरों के प्रति व्यवहार में कुछ ऐसा ना करें जिससे उनका तनाव बढ़े.
- बाघ-शेर और इसी प्रजाति के दूसरे जानवरों पर ख़ास नज़र रखें. अगर उनमें कोई भी असामान्य लक्षण जैसे खांसना, नाक से पानी आना, सांस लेने में तकलीफ़, डायरिया या बुख़ार नज़र आए तो तुरंत आला अधिकारियों को सूचित करके सैंपल लिया जाए.
- WHO/OIE/ICMR की गाइडलाइन्स के आधार पर ही सैंपल लिया जाए और टेस्ट के लिए भेजा जाए.
- इन बड़े मांसाहारी जीवों को मल्टी-विटामिन ख़ासतौर पर विटामिन सी दिया जाए.
- बायोवेस्ट को डिस्पोज़ करने के लिए जारी दिशानिर्देश का पालन किया जाए.


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लेकिन कितना अधिक ख़तरा है चिड़ियाघर में मौजूद जानवरों के लिए
आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर (उप्र) के निदेशक आर के सिंह यह मानते हैं कि चिड़ियाघर में मौजूद जानवरों के लिए ख़तरा है.
वो कहते हैं, "इस बात से किसी सूरत में इनकार नहीं किया जा सकता है कि चिड़ियाघर में रहने वाले जानवरों को जंगल में रहने वाले जानवरों की तुलना में कहीं अधिक ख़तरा है."
उनके मुताबिक़, "जो जानवर जंगल में रहते हैं उनका मानव से संपर्क ना के बराबर होता है लेकिन चिड़ियाघर में या ऐसे किसी भी ज़ूलॉजिकल पार्क में जानवर इंसानों के सीधे संपर्क में आते हैं, ऐसे में इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है कि चिड़ियाघर में मौजूद जानवरों के लिए ख़तरा है."
आरके सिंह के अनुसार, देश में तीन लैब्स तैयार किए गए हैं जहां जानवरों के सैंपल टेस्ट होने के लिए भेजे जा सकते हैं.
- नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ हाई सिक्यॉरिटी एनिमल डिज़ीज़ (NIHSAD) भोपाल (मप्र)
- नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन इक्विंस (NRCE) हिसार, (हरियाणा)
- सेंटर फ़ॉर एनिमल डिज़ीज़ रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक (CADRAD), इंडियन वेटेरिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट, इज्जतनगर(उप्र)

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डॉ सिंह कहते हैं जानवरों के संदर्भ में टेस्ट का रिज़ल्ट देना आसान है लेकिन उनका सैंपल जमा करना सबसे मुश्किल काम है.
उनके मुताबिक़, "जानवर का सैंपल आप यूं तो जाकर नहीं ले सकते. उसके लिए तमाम एहतियात करने पड़ते हैं. बड़े मांसाहारी जानवर को अनेस्थिसिया देकर बेहोश करना होता है और उसके बाद ही कहीं जाकर सैंपल लिया जा सकता है."
वो मानते हैं कि चिड़ियाघर या ऐसी किसी जगह पर रहने वाले जानवर के लिहाज़ से यह एक बड़ी चुनौती है.
डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ फॉरेस्ट्स सोनाली घोष के मुताबिक़, ब्रॉन्क्स चिड़िया घर में पहला मामला आने के बाद भारत में इस लिहाज़ से कई ज़रूरी क़दम उठाए गए हैं. बीबीसी के सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण ने देश के सभी चिड़ियाघरों को ज़रूरी एहतियात अपनाने को कहा है.

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कितना मुश्किल होता है जानवरों का टेस्ट?
IVRI के एक अन्य अधिकारी के मुताबिक़, "ख़तरा है, इसीलिए सावधानी बरती जा रही है."
IVRI के इस अधिकारी के मुताबिक़ जानवरों में कोरोना वायरस को लेकर जो सबसे अधिक ख़तरे की बात है वो ये कि इनका टेस्ट काफ़ी मुश्किल होता है. इसके लिए जानवर को एनेस्थिसिया देना पड़ता है.
कई बार एनेस्थियिया जानवरों के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है. इसके की साइड-इफ़ेक्ट भी हो सकते हैं जिससे उनकी सेहतपर असर पड़ सकता है.
आम तौर पर जानवरों का टेस्ट तीन तरीक़े से किया जाता है. उनके मुताबिक़ जानवरों में नैसोफैरेंजील टेस्ट, ओरोफैरेंजील टेस्ट और अगर जानवर की मौत हो जाती है तो उसके फेफड़े और सांस की नली से टेस्ट किया जाता है. कई बार ब्लड सैंपल से भी टेस्ट किया जाता है.

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लेकिन क्या जानवर ठीक हो जाते हैं?
IVRI के अधिकारी मानते हैं कि अगर जानवरों में सही समय पर पहचान हो जाए और जानवर को पूरा इलाज मिले तो उसके ठीक होने की पूरी संभावना होती है. लेकिन यह ज़रूरी है कि जानवर को पूरी देखभाल मिले. यह बहुत हद तक वैसा ही है जैसा इंसानों के लिए.
वाइल्ड लाइफ़ कंज़र्वेशन सोसाइटी ने 22 अप्रैल को जारी किए गए एक प्रेस रिलीज़ में कहा है कि नादिया (ब्रॉन्क्स चिड़ियाघर की वही बाघिन जो पांच अप्रैल को पॉज़ीटिव मिली थी) धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. उसकी खाने-पीने की और दूसरी आदतें सामान्य हो रही हैं, जो कि एक अच्छी ख़बर है.

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