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बांग्लादेश में विद्रोह थमा, कई लापता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बांग्लादेश सरकार के अनुसार बुधवार को ढाका में शुरु हुआ अर्धसैनिक बलों के जवानों का विद्रोह अब थम गया है. सेना ने विद्रोह वाले परिसर से नौ सैन्य अधिकारियों के शव बरामद किए हैं. माना जा रहा है कि विद्रोहियों ने ही इन्हें मारा होगा. लेकिन अभी भी सेना के कई अधिकारी लापता हैं और उनकी तलाश की जा रही है. इनकी संख्या सौ से अधिक बताई जा रही है. अभी यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि ढाका के साथ दूसरे शहरों में फैल गया विद्रोह भी थम गया है या नहीं. सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि विद्रोह में शामिल जवानों ने हथियार डाल दिए हैं. साथ ही उन लोगों को भी रिहा कर दिया है जिन्हें बंधक बनाया गया था. जवानों के समर्पण से कुछ समय पहले ही प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने चेतावनी दी थी कि अगर विद्रोही तत्काल हथियार नहीं डालते हैं तो सरकार कड़े क़दम उठा सकती है. बांग्लादेश के घटनाक्रम को जानने के लिए इन्हें भी क्लिक करें इसी चेतावनी के बाद ढाका स्थित बीडीआर परिसर के बाहर सेना की ओर से टैंकों की तैनाती भी शुरू कर दी गई थी. व्यापक विद्रोह गुरुवार को इन जवानों का विद्रोह राजधानी ढाका के बाहर कम से कम 12 अन्य शहरों में फैल गया था. सेना को ढाका में बीडीआर मुख्यालय के बाहर 10 टैंक लगाने पड़े थे. बुधवार को ढाका में बीडीआर जवानों के सशस्त्र विद्रोह के दौरान लगभग 50 लोगों मारे गए थे. गुरुवार को विद्रोह के और जगहों पर फैलने के बाद ढाका में सुबह फिर से फ़ायरिंग हो गई थी. ढाका के पास विद्रोही जवानों ने अपने कुछ अधिकारियों की हत्या कर उनके शव बूढ़ीगंगा नदी में फेंक दिए थे. प्रधानमंत्री शेख़ हसीना ने जवानों को आम माफ़ी देने की घोषणा की थी जिसके बाद ढाका के विद्रोही जवानों ने हथियार डालने शुरु कर दिए और गुरुवार सुबह से उन्होंने अपने मुख्यालय में बंधक बनाए गए लोगों को भी रिहा करना शुरु कर दिया था. लेकिन गुरुवार सुबह होते ही प्रधानमंत्री के आश्वासन को ठुकराते हुए कई और शहरों में बीडीआर जवानों ने विद्रोह कर दिया. पूरे देश में बीडीआर के 64 कैंप हैं जहाँ 45 हज़ार जवानों की तैनाती है. बीडीआर जवानों का कहना था कि वर्षों तक अपने अधिकारियों के बुरे बर्ताव को झेलने के बाद वे विद्रोह करने पर मजबूर हुए. |
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