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सोमवार, 29 दिसंबर, 2008 को 18:52 GMT तक के समाचार
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'शेख हसीना की पार्टी को बहुमत'

अवामी लीग समर्थक
इन चुनावों को लेकर अवामी लीग के समर्थक उत्साहित हैं

बांग्लादेश के संसदीय चुनावों के प्रारंभिक परिणामों के अनुसार शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग ने चुनावों में बड़ी जीत हासिल की है.

अवामी लीग को संसद की 300 में से 220 सीटें मिल चुकी हैं जो ज़बर्दस्त बहुमत है.

अवामी लीग की शेख हसीना और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की ख़ालिदा ज़िया ने पूरे परिणाम आने तक टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है लेकिन ख़ालिदा के पास शायद ही कुछ कहने के लिए बचेगा.

नेशनलिस्ट पार्टी की ख़ालिदा ज़िया का कहना था कि अभी ये कहना कि कौन जीत रहा है, बहुत जल्दबाजी होगी.

उनकी पार्टी ने चुनावों में अनियमितताओं का आरोप लगाया है.

विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ वर्षों पहले ख़ालिदा ज़िया की पार्टी की सरकार थी और सरकार उनकी पार्टी से बेहद नाराज़ थे.

आने वाले दिन ख़ालिदा ज़िया के लिए मुश्किल का दौर होगा क्योंकि कुछ सीटों के साथ न तो उनके पास शिकायत का मौका होगा और न ही मज़बूत विपक्ष के रुप में ही वो स्थापित हो सकेंगी.

शेख़ हसीना मतदान से ख़ुश हैं

उल्लेखनीय है कि कड़ी सुरक्षा के बीच बांग्लादेश में क़रीब 70 फ़ीसदी मतदान हुआ था.

बांग्लादेश के मुख्य चुनाव आयुक्त एटीएम शमसुल हुदा ने मतदान में बड़ी संख्या में शामिल होने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया और कहा है कि अच्छी संसद का गठन होगा.

ठंड के बावजूद बांग्लादेश में मतदान के लिए लंबी-लंबी कतारें देखी गईं थीं. मतदान के लिए लोगों में काफ़ी उत्साह था.

मुख्य मुक़ाबला

इस बार भी 300 सीटों वाली संसद के लिए मुख्य मुक़ाबला शेख़ हसीना की आवामी लीग और ख़ालिदा ज़िया के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के बीच था.

ख़ालिदा ज़िया चुनावों में मुख्य दावेदार हैं

बांग्लादेश की राजनीति में दोनों नेताओं ने अपने अपने गठबंधन बनाए है. आवामी लीग के महाजोत में 14 दल शामिल हैं जिसमें पूर्व राष्ट्रपति शेख इरशाद की जातीय पार्टी भी है.

दूसरी ओर ख़ालिदा ज़िया के चार दलों के गठजोड़ में जमाते इस्लामी शामिल है.

इससे पहले 2001 में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में थी जिसके कार्यकाल के समापन पर कार्यकारी सरकार ने सेना की मदद से दो साल तक शासन किया.

प्रचार के लिए केवल 16 दिनों का समय था और नेताओं ने देश भर में सभाएं की और सस्ते खाने, भ्रष्टाचार से लड़ने, रोज़गार बढ़ाने जैसे वादे किए.

बांग्लादेश की दोनों प्रमुख नेताओं को भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल की सज़ा काटनी पड़ी थी और चुनाव के पहले उन्हें रिहा किया गया था.

शेख हसीना और ख़ालिदा ज़िया बांग्लादेश चुनाव
चुनाव प्रचार अपनी चरम पर है और राजधानी ढाका पोस्टरों से भरी पड़ी है.
बांग्लादेश में चुनावी पोस्टर सियासी दलों का ब्यौरा
बांग्लादेश के चार मुख्य राजनीतिक दलों का अपना-अपना रोचक इतिहास है.
अल्पसंख्यकों की कहनी
बांग्लादेश के हिंदुओं को संभावित चुनावी हिंसा का डर सता रहा है.
शेख हसीनाहसीना को आज़ादी
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री को इलाज के लिए जेल से रिहा किया गया है.
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