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गुरुवार, 25 दिसंबर, 2008 को 07:05 GMT तक के समाचार
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बांग्लादेश में चुनाव प्रचार चरम पर

शेख हसीना और ख़ालिदा ज़िया
ख़ालिदा ज़िया और शेख हसीना वाजेद आमने-सामने हैं

बांग्लादेश में 29 दिसंबर को आम चुनाव होने जा रहे है. तीन सौ सदस्यीय संसद के लिए प्रचार अपनी चरम पर है और राजधानी ढाका पोस्टरों से पटी पड़ी है.

लेकिन यहाँ पोस्टर और पर्चे रंगीन नहीं हैं. चुनाव आयोग ने ख़र्च कम करने के लिए जो नियम बनाए हैं, उनमें एक ये भी है.

यहाँ पर सुरक्षा के भी ज़बर्दस्त इंतजा़म किए गए हैं. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की नेता ख़ालिदा ज़िया की सभा के बाद बम की बरामदगी और भारतीय गुप्तचर सूचना के अनुसार आवामी लीग की नेता शेख हसीना की जान को ख़तरे की रिपोर्टो के बाद दोनों नेताओं की सुरक्षा और भी कड़ी कर दी गई है.

ज़ोरदार प्रचार

सुरक्षा इंतज़ाम कड़े किए जाने से शेख हसीना के प्रचार में कमी आई है और वो दिन में दो तीन सभाएं ही कर पाती हैं जबकि खालिदा ज़िया रोज़ 15 से 20 सभाएं कर रही है.

आवामी लीग की नेता नए प्रचार माध्यम जैसे वीडियो कॉंफ्रेंसिंग का भी सहारा ले रही है.

 आम मतदाता के लिए बढ़ती महंगाई, क़ानून व्यवस्था और इस्लामी चरमपंथ का बढ़ता प्रभाव, उर्जा संकट, मानवाधिकारों का उल्लंघन और बेरोज़गारी सभी मसले हैं
शहरियार कबीर

जनता लोकतंत्र की वापसी का इंतज़ार कर रही है और टीकाकार और लेखक शहरयार कबीर का मानना है, "आम मतदाता के लिए बढ़ती महंगाई, क़ानून व्यवस्था और इस्लामी चरमपंथ का बढ़ता प्रभाव, उर्जा संकट, मानवाधिकारों का उल्लंघन और बेरोज़गारी सभी मसले हैं."

बांग्लादेश में चुनाव एक कार्यवाहक सरकार के तहत होते है और मौजूदा सरकार ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ मुहीम तेज़ की थी पर खालिदा ज़िया के चुनाव के बहिष्कार की धमकी के बाद यह मुहीम भी यूं लगता है कि समाप्त हो गई.

भ्रष्टाचार मुद्दा

हालाँकि जनता में भ्रष्टाचार पर नाराज़गी के मद्देनज़र कोशिश की गई है की दाग़ी छवि के उम्मीदवारों को चुनावों से बाहर रखा जाए.

बंग्लादेश की राजनीति पर शोध कर रहे और अवामी लीग के करीबी माने जाने वाले शमशुल अरेफ़िन का कहना है, "इस बार युवा मतदाताओं को लुभाने की ख़ास कोशिश हो रही है. अवामी लीग का विज़न 2021 भविष्य में बांग्लादेश की प्रगति का सपना दिखता है जो की 13 करोड़ युवा मतदाताओं को आकर्षित करेगा, और ख़ालिदा अपनी शासन की उपलब्धियां गिना रही है.’’

चुनाव बाद इस पर कितना काम हो पाता है और बांग्लादेश की राजनीति की यह दो दिग्गज नेता कितनी खड़ी उतरती हैं यह देखने की बात होगी.

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