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बुधवार, 30 जुलाई, 2008 को 18:05 GMT तक के समाचार
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बांग्लादेश में बन रही है 'नई ज़मीन'
बांग्लादेश बाढ़ (फ़ाईल फ़ोटो)
बाग्लादेश में बाढ़ भारी तबाही मचाती हैं
ढाका के वैज्ञानिको का कहना है नए शोध से पता चलता है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन से बांग्लादेश में सुमद्र का जलस्तर बढ़ने का डर उतना नहीं हो सकता है जितना कि पहले अंदाज़ा था.

वैज्ञानिको का कहना कि उपग्रह से मिली तस्वारों से पता चलता है कि देश में नदियों से बहकर आने वाली जमा हुई तलछट से ज़मीन का दायरा बढ़ रहा है.

संयुक्त राष्ट्र के वैज्ञानिको की रिपोर्ट में कहा गया था कि 2050 तक समुद्र का जलस्तर बढ़ने से “बांग्लादेश का 17 प्रतिशत भाग डूब जाएगा और इससे 30 लाख लोग बेघर हो जाएँगे.”

नए द्वीप

ढाका स्थित पर्यावरण और भूगोलिक सूचना सेवाओं के ममीनुल हक़ सरकार के मुताबिक़ बांग्लादेश की पिछले 32 सालों की उपग्रह से मिली तस्वीरें दर्शाती हैं कि देश के भू-भाग में सालाना 20 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हो रही है.

उंहोने कहा “ इसकी वजह ये है कि गंगा और ब्रहमपुत्र के अलावा लगभग 200 नदियां हर साल बांग्लादेश से गुज़रने पहले अपने साथ हिमालय से लाई लाखों टन तलछट यहां छोड़ जाती हैं.”

हक़ के अनुसार बहकर आई समस्त तलछट का केवल एक तिहाई हिस्सा ही बंगाल की खाड़ी में जा गिरता है.

इसका एक बड़ा हिस्सा बांग्लादेश के विशाल डेल्टा में नदियों के किनारे न सिर्फ़ जमा हो जाता है बल्कि इससे एक नया द्बीप बन जाता है.

श्री सारकर का कहना है कि अगले 50 सालों में देश में 1000 वर्ग किलोमीटर तक ज़मीन का बढ़ोतरी हो सकती है.

मतभेद

जलवायु परिवर्तन पर बने संयुक्त राष्ट्र के अंतरशासकीय पैनल के अग्रणी संलेखक डाक्टर अतीक़ रहमान ने बीबीसी को बताया कि इस नए शोध में कुछ थोड़ा ही ऐसा है जिस पर ग़ौर से सोचा जाए.

क्योंकि तटीए इलाक़ों के पास रहने वाले बहुत से लोगों ने देखा है कि समुद्र तल उनके पूर्वजों के समय के मुक़ाबले अब ज़्यादा है.

डाक्टर अतीक़ ने कहा, “तलछट जमा होने से बनने वाली ज़मीन की दर जलवायु परिवर्तन और समुद्र तल के बढ़ने की दर के मुक़ाबले काफ़ी कम है.”

 तलछट जमा होने से बनने वाली ज़मीन की दर जलवायु परिवर्तन और समुद्र तल के बढ़ने की दर के मुक़ाबले काफ़ी कम है
अतीक़ रहमान

“तो जब तक देश के हिस्सों में नई ज़मीन बनेगी तब तक और हिस्सों में काफ़ी बड़ी संख्या में ज़मीन ख़त्म हो चुकी होगी.”

किसी भी हालत में नई ज़मीन को काम योग्य बनने में सदियाँ लग जाएँगी.

डाक्टर अतीक़ ने कहा इस समय ज़रूरत इस बात की है कि बांग्लादेश के समुद्र तट पर पड़ने वाले प्रत्येक गाँव का निरीक्षण किया जाए.

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