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सोमवार, 09 फ़रवरी, 2009 को 16:50 GMT तक के समाचार
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चरपमंथ पर सहयोग का वादा

प्रणब मुखर्जी
प्रणब मुखर्जी ने वाणिज्य मंत्री से भी मुलाक़ात की
बांग्लादेश में आवामी लीग के सत्ता में आने के बाद भारत सरकार की ओर से पहली उच्चस्तरीय यात्रा के तहत विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी सोमवार को ढाका पहुँचे.

प्रणब मुखर्जी ने इस यात्रा के दौरान बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना, विदेश मंत्री दीपू मोनी, गृह मंत्री सहारा खातून और वाणिज्य मंत्री फ़ारूक ख़ान से बातचीत की.

प्रणब मुख़र्जी के इस दौरे में प्रस्तावित क्षेत्रीय स्तर पर आतंकवाद से लड़ने के लिए संयुक्त तंत्र के बारे में चर्चा और सुरक्षा, व्यापार और सड़क यातायात सहित कई और अहम मुद्दों पर भी बातचीत हुई.

साथ ही द्विपक्षीय व्यापार और निवेश की दो संधियों पर हस्ताक्षर भी हुए.

ढाका पहुँचने के बाद भारत के विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के लिए क्षेत्र में बढ़ते चरमपंथ और आंतकवाद से लड़ना एक अहम मुद्दा है और आवश्यक है की दोनों के बीच सुरक्षा मामलों में सहयोग और बढ़े.

बांग्लादेश के विदेश मंत्री दीपू मोनी ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि बांग्लादेश की सरकार अपनी धरती को किसी भी चरमपंथी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगी.

कार्रवाई

उन्होंने कहा, "चाहे कोई भी व्यक्ति हो, किसी भी देश का हो या उसका संबंध किसी भी संस्थान से क्यों न हो- इस क्षेत्र में या फिर दुनिया में कहीं भी, किसी भी रूप में, क्षति पहुँचाने के लिए हम अपनी धरती का इस्तेमाल नही होने देंगे और अगर हमारे पास इस बारे में पुख्ता सबूत होंगे तो हम उस पर ध्यान देंगे और कार्रवाई भी करेंगे."

 चाहे कोई भी व्यक्ति हो, किसी भी देश का हो या उसका संबंध किसी भी संस्थान से क्यों न हो- इस क्षेत्र में या फिर दुनिया में कहीं भी, किसी भी रूप में, क्षति पहुँचाने के लिए हम अपनी धरती का इस्तेमाल नही होने देंगे और अगर हमारे पास इस बारे में पुख्ता सबूत होंगे तो हम उस पर ध्यान देंगे और कार्रवाई भी करेंगे
दीपू मोनी

पिछले साल दिसंबर में बांग्लादेश में लोकतांत्रिक सरकार की वापसी से पहले कुछ वर्षों तक चरमपंथ को लेकर भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव आ गया था.

भारत ने कई बार ये आरोप लगाए थे की बांग्लादेश में हूजी जैसे संगठन भारत के ख़िलाफ़ चरमपंथी गतिविधियाँ कर रहे हैं.

वहीं उद्योग जगत की बात करें तो बिगड़ते रिश्तों की वजह से टाटा जैसी कंपनियों ने बांग्लादेश में निवेश करने से पहले ही अपने हाथ पीछे कर लिए.

लेकिन अब भारत सरकार ये आशा करती है कि चुनावों में शेख़ हसीना की भारी जीत के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों में तेज़ी से सुधार आ सकता है. इससे भारत और बांग्लादेश के बीच सुरक्षा और व्यापार सहित सभी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ सकता है.

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