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शनिवार, 03 जनवरी, 2009 को 09:24 GMT तक के समाचार
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'हमले के अपराधियों को सौंपे पाकिस्तान'
मनमोहन सिंह
प्रधानमंत्री का कहना है कि पाकिस्तान नेतृत्व को आतंकवाद से लड़ने की इच्छाशक्ति दिखानी चाहिए
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि भारत-पाकिस्तान के मुद्दों को सुलझाने के लिए जंग कोई समाधान नहीं है. लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि 'उम्मीद है कि पाकिस्तान (मुंबई हमलों) अपराधियों को भारत को सौंपगा ताकि उनके ख़िलाफ़ भारत में मुकदमा चलाया जा सके.'

शिलांग में संवाददाताओं से बातचीत में मनमोहन सिंह ने कहा कि देश से आतंकवाद को जड़ से ख़त्म करने के लिए भारत किसी भी हद तक जाएगा.

मुंबई हमलों के संदर्भ में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा, "पाकिस्तान का नेतृत्व ये समझेगा कि इन आपराधिक हरकतों के बाद सभी सभ्य देशों की ज़िम्मेदारी बनती है कि इन्हें अंजाम देने वाले अपराधियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई हो. हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान इन अपराधियों को भारत को सौंपेगा ताकि इनके ख़िलाफ़ हमारे देश में मुकदमा चलाया जा सके."

मौजूदा हालात की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के सामने दो सबसे बड़ी चुनौतियाँ हैं - 'पहली आर्थिक मंदी और दूसरी आतंकवाद.'

 पाकिस्तान का नेतृत्व ये समझेगा कि इन आपराधिक हरकतों के बाद सभी सभ्य देशों की ज़िम्मेदारी बनती है कि इन्हें अंजाम देने वाले अपराधियों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई हो. हम उम्मीद करते हैं कि पाकिस्तान इन अपराधियों को भारत को सौंपेगा ताकि इनके ख़िलाफ़ हमारे देश में मुकदमा चलाया जा सके
मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री, भारत

'समझौता नहीं'

उन्होंने कहा कि सुरक्षा के मोर्चे पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.

उन्होंने कहा, "बढ़ता आतंकवाद और नक्सलवाद चिंता का विषय है. सरकार आतंकवाद के साथ किसी तरह का समझौता नहीं करेगी."

मुंबई, दिल्ली और असम में हुए चरमपंथी हमलों के संबंध में उन्होंने कहा, "हमें शुरू में कुछ झटका लगा है, लेकिन हम इससे उबर जाएँगे. देश से आतंकवाद का सफ़ाया करने के लिए सरकार किसी भी हद तक जाएगी."

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार प्रतिबंधित संगठन अल्फ़ा के साथ बातचीत के लिए तैयार है, उन्होंने कहा, "सभी चरमपंथी संगठनों को ये समझ लेना चाहिए कि उनके हथियार डालने के बाद ही बातचीत संभव है. हम उनके साथ कोई समझौता नहीं करेंगे जो अपनी असली या काल्पनिक समस्याओं के लिए बंदूकों या हथियारों में यकीन रखते हैं."

इससे पूर्व, प्रधानमंत्री ने शिलांग में 96वें भारतीय विज्ञान सम्मेलन का उदघाटन किया. उन्होंने विश्वविद्यालयों से शोध पर ज़्यादा ध्यान देने और प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की अपील की.

उन्होंने कहा कि अनुसंधान के मामले में न केवल भारत विकसित देशों से पिछड़ रहा है, बल्कि एशिया की विकासशील आर्थिक शक्तियाँ भी उसे पीछे छोड़ रही हैं.

मनमोहन सिंह ने कहा, "शोध का बेहतर माहौल बनाने के लिए विश्वविद्यालयों को और प्रयास करने होंगे."

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