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अमरीका अफ़ग़ानिस्तान में सैनिक बढ़ाएगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के शीर्ष सैन्य अधिकारी एडमिरल माइक मुलेन ने अफ़ग़ानिस्तान में 30 हज़ार अतिरिक्त अमरीकी सैनिकों को भेजने की घोषणा की है. उनका कहना है कि ये अगले साल के मध्य तक भेजे जा सकते हैं यदि इस योजना को मंज़ूरी मिल जाती है तो अफ़ग़ानिस्तान में तैनात अमरीकी सैनिकों की संख्या अगले साल की गर्मियों तक दोगुनी हो जाएगीं. ये वहाँ तैनात अमरीकी सैनिकों में अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि होगी. हालांकि इस घोषणा से शायद ही किसी को हैरानी हुई है लेकिन उसके बावजूद ये एक भारी बढ़ोत्तरी मानी जा रही है. इस वक्त अफ़ग़ानिस्तान में नैटो के 51 हज़ार सैनिक मौजूद हैं जिनमें 31 हज़ार अमरीकी सैनिक हैं. तीन हज़ार सैनिकों की पहली खेप अगले महीने अफ़ग़ानिस्तान पहुँच जाएगी और उन्हे लोगार और वर्दाक प्रांत में तैनात किया जाएगा. काबुल से लगनेवाले इन दोनों प्रांतों में पिछले कुछ महीनों में तालेबान के ख़िलाफ़ संघर्ष और कड़ा हो गया है. गंभीर स्थिति कुछ हद तक इस फ़ैसले से एक बार फिर ये बात साफ़ हो गई है कि अफ़ग़ानिस्तान में सुरक्षा की स्थिति बेहद नाजुक है. वहीं दूसरी तरफ अमरीका और नैटो अब भी इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि अफ़ग़ानिस्तान की समस्या का हल सैनिक कार्रवाई से नहीं ढूँढा जा सकता. इसीलिए अतंरराष्ट्रीय समुदाय अगले 12 महीनों में अफ़ग़ानिस्तान में प्रशासन और विकास पर ज्यादा ध्यान देगा, खासतौर से स्थानीय स्तर पर विशेष बल दिया जाएगा. उधर राष्ट्रपति निर्वाचित बराक ओबामा के सलाहकार इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि अफ़ग़ानिस्तान की समस्या का क्षेत्रीय तौर पर हल निकाला जाना चाहिए. इसका मतलब है कि उसके पड़ोसी देश पाकिस्तान, भारत और ईरान को बातचीत शामिल करना बहुत ज़रूरी है. कहीं न कहीं ये बात भी उभर कर आ रही है कि लंबे समय से चल रहे संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय समुदाय ही नहीं आम अफ़गानी नागरिक भी अपना धीरज खो रहे हैं. |
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