BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
बुधवार, 17 दिसंबर, 2008 को 12:15 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
सुरक्षा विधेयक पर संसद में बहस
चिदंबरम
चिदंबरम ने अपील की कि विधेयक सर्वसम्मति से पारित हों, चाहे कोई कमज़ोरियाँ अगले सत्र में दूर हो जाएँ
भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी और ग़ैर क़ानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम संबंधी) संशोधन विधेयक में मौलिक अधिकारों और जनता की कड़े क़ानूनों की माँग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की गई है.

लोकसभा में बुधवार को लंबी बहस के बाद ये दोनों विधेयक पारित हो गए हैं.

विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "हम सैद्धांतिक रूप से सत्तापक्ष से सहमत हैं. अच्छा है कि कांग्रेस ने 10 साल के बाद अपना रूख़ बदला है और ये माना है कि कड़े क़ानून की ज़रूरत है. हम तो ये बहुत पहले से कह रहे थे."

 सरकार ने कोशिश की है कि वह मौलिक अधिकारों और जनता की कड़े क़ानून बनाने की माँग के बीच न्यायसंगत संतुलन कायम करे. इसके साथ दो विधेयक लाए जा रहे हैं जिनसे कारगर ढंग से आतंकवाद का मुकाबला किया जा सके
गृह मंत्री पी चिदंबरम

केंद्र और राज्यों के अधिकार

गृह मंत्री पी चिदंबरम ने कहा, "सरकार ने कोशिश की है कि वह मौलिक अधिकारों और जनता की कड़े क़ानून बनाने की माँग के बीच न्यायसंगत संतुलन कायम करे. इसके साथ दो विधेयक लाए जा रहे हैं जिनसे कारगर ढंग से आतंकवाद का मुकाबला किया जा सके."

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के अंतरगत कार्रवाई कुछ विशेष परिस्थितियों में ही की जाएगी क्योंकि सरकार को ख़ास घटनाओं की जाँच का अपना मूल कर्तव्य निभाना है.

उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे सर्वसम्मति से विधेयकों को पारित करें और यदि उन्हें इनमें कोई कमियाँ नज़र आएँ तो उन्हें अगले संसद सत्र में दूर किया जा सकता है.

उनका कहना था कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी के गठन से राज्यों के मामलों की जाँच के अधिकार पर असर नहीं पड़ेगा और राज्यों का भी जाँच में सहयोग लिया जाएगा.

चिदंबरम का कहना था, "हमनें केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के जाँच के अधिकारों के बीच संतुलन कायम करने की कोशिश की है."

 संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रस्ताव पारित किया और देशों को सूचित किया कि उनके मौजूदा क़ानून, पैदा हो रही परिस्थितियों के लिए क़ाफ़ी नहीं हैं. अमरीका ने ऐसे क़ानून बनाए लेकिन उस समय का विपक्ष और मौजूदा सत्ताधारी पार्टियाँ इससे सहमत नहीं थीं. हमने पोटा बनाया तो आपने ऐसा बर्ताव किया जैसे हमने कोई अपराध कर डाला
विपक्ष के नेता आडवाणी

इन विधेयकों में किसी संदिग्ध व्यक्ति को बिना मुकादमा चलाए पुलिस हिरासत में रखने और ज़मानत संबंधी भी विस्तृत्व प्रावधान हैं.

'सुबह का भूला...भूला ही है'

उधर विपक्ष के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सिद्धांत तौर और मूल रूप से इन विधेयकों के बारे में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार से सहमत है.

उनका कहना था कि उन्हें संतोष है कि दस साल बाद कांग्रेस ने अपने मूल रुख़ में परिवर्तन किया है और ये समझा कि वर्तमान क़ानून पर्याप्त नहीं हैं.

उनका कहना था कि भारतीय जनता पार्टी तो बहुत समय पहले से ही ऐसा कहती आई थी.

आडवाणी ने उदाहरण दिया, "अमरीका में ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद संयुक्त राष्ट्र ने एक प्रस्ताव पारित किया और देशों को सूचित किया कि उनके मौजूदा क़ानून, पैदा हो रही परिस्थितियों के लिए क़ाफ़ी नहीं हैं. अमरीका ने ऐसे क़ानून बनाए लेकिन उस समय का विपक्ष और मौजूदा सत्ताधारी पार्टियाँ इससे सहमत नहीं थीं. हमने पोटा बनाया तो आपने ऐसा बर्ताव किया जैसे हमने कोई अपराध कर डाला."

सत्तापक्ष पर कटाक्ष करते हुए आडवाणी का कहना था - 'सुबह का भूला शाम को घर आ जाए तो भूला नहीं कहलाता....लेकिन इस बीच यदि अनर्थ हो जाए और बहुत नुक़सान हो जाए.....तो वह भूला ही है."

आडवाणी का कहना था कि उन्हें पता है कि टाडा का दुरुपयोग हुआ था लेकिन उनका कहना था कि प्रयास ये होना चाहिए कि क़ानून सख़्त हो लेकिन उसका दुरुपयोग न हो.

उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और संयुक्त प्रगतिशील गठबंदन अध्यक्ष सेनिया गांधी का नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने कहा था कि चरमपंथी घटनाएँ तो क़ानून की समस्या हैं, इनसे राज्य सरकारें निपटेंगी और वर्तमान क़ानून काफ़ी हैं.

मुंबईलिपस्टिक से ख़फ़ा...
भाजपा नेता नक़वी कहते हैं कि केवल लिपस्टिक वाली महिलाएँ आक्रोश में हैं.
'इसमें कुछ ग़लत नहीं'
रामगोपाल वर्मा और रितेश देशमुख को घुमाने पर मुख्यमंत्री ने सफ़ाई दी.
इससे जुड़ी ख़बरें
केरी-मनमोहन बैठक में मुंबई पर चर्चा
15 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
संदिग्ध हमलावर के बचाव पर बवाल
15 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
'मिट्टी' को नहीं मिल रही मिट्टी
01 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
'वे हमारी ज़मीन में दफ़न नहीं हो सकते'
01 दिसंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
शिवराज पाटिल ने इस्तीफ़ा सौंपा
30 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
'सरकार को सत्ता में रहने का हक़ नहीं'
30 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>