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रणनीति में बदलाव या विदेशियों का हाथ? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई में बुधवार की रात चरमपंथियों ने कई जगहों पर हमले किए. इन हमलों में सौ से अधिक लोगों की जानें गईं तो तीन सौ से अधिक अन्य लोग घायल हुए. चरमपंथियों ने शहर के तीन पाँच सितारा होटलों में कुछ लोगों को बंधक भी बनाए. हमलों के 24 घंटे बाद भी तीन जगहों पर अभी भी पुलिस और चरंपमथियों के बीच मुठभेड़ जारी है. लेकिन क्या ये हमले देश में होने वाले पिछले बम धमाकों या हमलों से भिन्न है? क्या चरमपंथियों ने अपनी रणनीति में कोई परिवर्तन किया है? पेश है दो जान माने रक्षा विश्लेषकों की राय. रणनीति में बदलाव: प्रकाश सिंह पूरे घटनाक्रम पर नज़र डालें तो लगता है कि यह चरमपंथियों की रणनीति में परिवर्तन है. आज से पहले ये होता यह था कि चरमपंथी कहीं विस्फोट कर देते थे तो कहीं गोलाबारी, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि चरमपंथी समुद्री रास्ते से मुंबई आए और एक के बाद एक कई घटनाओं को अंजाम देते चले गए. मुंबई में जिस तरह से हमला हुआ है उसे देखकर लगता है कि यह एक बहुत सुनियोजित कार्रवाई है.
चंरमपंथियों ने जिस तरह से हमला किया उसे देखकर लगता है कि उन्हें काफ़ी प्रशिक्षण दिया गया था. वे आधुनिक हथियारों से लैस भी थे. चरमपंथियों ने जिस तरह से देश की आर्थिक राजधानी पर हलमा किया है दरअसल वो हमारी राजसत्ता को खुली चुनौती है. लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण बात ये है कि इस तरह की घटनाओं से निपटने में हमारी पुलिस बहुत कमज़ोर है. ऐसे हमलों से सबसे पहले स्थानीय पुलिस को ही मुक़ाबला करना पड़ता है. लेकिन हमारे राजनेताओं ने पुलिस का राजनीतिकरण कर रखा है. अंदर से यब विभाग काफ़ी कमज़ोर और खोखला हो गया है. आज हर तरफ़ पुलिस सुधार की बात हो रही है. सुप्रीम कोर्ट ने भी पुलिस में सुधार लाने के लिए कई तरह के निर्देश दे रखे हैं. जिसे लागू करने में छोटे राज्यों के साथ-साथ बड़े राज्य भी ढिलाई बरत रहे हैं. विदेशी ही हैं: पार्थसारथी यह चरमपंथियों की रणनीति में नाटकीय परिवर्तन नहीं है. जिस गुट ने यह कार्रवाई की है वह किसी भी तरह से भारत के नागरिक नहीं हैं. उन्हें जिस तरह का प्रशिक्षण दिया गया है. उस तरह का प्रशिक्षण कोई सेना देती है या कोई खुफ़िया एजेंसी. मुंबई में हमला करने वाले चरमपंथी एके-47 से लैस हैं. इस तरह का हथियार भारत में नहीं सीमापर मिलता है. मुंबई हमले में शामिल एक चरमपंथी ने भारत के एक निजी टीवी समाचार चैनल से बात की है. उनके शब्दों के उच्चारण को सुनकर ऐसा नहीं लगता है कि वे भारत के नागरिक हैं. वो बार-बार 'हैदराबाद दक्कन' शब्द बोल रहे थे. उनका उच्चारण किसी पाकिस्तानी पंजाबी की तरह था और कोई भी भारतीय नागरिक हैदराबाद को 'हैदराबाद दक्कन' नहीं कहता. 'हैदराबाद दक्कन' पाकिस्तान में कहा जाता है. लश्करे-तैयबा कहता भी है कि हैदराबाद दक्क्न, जूनागढ़ और जम्मू और कश्मीर पाकिस्तान का अभिन्न अंग हैं और भारत के मुसलमानों की आज़ादी उसका धर्म है. इसलिए मुंबई में हुए हमले को देखकर लगता है कि इसके पीछे लश्केर-तैयबा ने कराए हैं. |
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