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गुरुवार, 27 नवंबर, 2008 को 12:22 GMT तक के समाचार
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'अचानक कुछ लोग गोलियां चलाने लगे'

एमिली
चरमपंथी हमलों से पर्टन उद्योग प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है
कोलाबा मार्केट और वहां का लियोपोल्ड कैफ़े का क्षेत्र पर्यटकों, ख़ासकर विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है लेकिन यहां हुए हमले से विदेशी पर्यटक विचलित हो उठे हैं.

सिडनी से आई एमिली लियोपोल्ड कैफ़े के पास खड़ी तो हैं लेकिन उनका मन मुंबई में नहीं है. हमें देख कर वो मुस्कुराई और बस इतना ही कहा कि वो मुंबई से बाहर निकलना चाहती हैं किसी भी तरह.

एमिली के साथ उनका छोटा बच्चा भी है और इस हादसे की छाप उन पर साफ़ दिखती है.

लियोपोल्ड कैफ़े में रसोइए का काम करने वाले महबूब खान तो और डरे हुए हैं. वो कहानी के सिरे जोड़ते हुए कहते हैं कि इसी कैफ़े से गोलीबारी शुरु हुई और उनके यहां काम करने वाला एक वेटर मारा भी गया.

महबूब कहते हैं, "मैं किचन में काम कर रहा था. क़रीब दो तीन लोगों के ग्रुप में कुछ विदेशी आए. उन्होंने खाना खाया, शराब पी और उसके बाद पता नहीं क्या हुआ गोलियां चलने की आवाज़ें आने लगीं. अफरा तफरी मची और अचानक कुछ लोग उठकर गोलियां चलाने लगे. इसी में हमारा एक वेटर भी मारा गया. कैफ़े तुरंत खाली हो गया और फिर सड़क पर गोलीबारी होने लगी."

हालांकि अभी भी पुलिस ने इस बारे में कुछ नहीं कहा है कि हमलावर विदेशी थे या भारतीय नागरिक थे.

विदेशियों को निशाना बनाया

हमला किसी ने भी किया हो लेकिन इसमें विदेशियों को भी निशाना बनाया गया है.

जर्मनी की जूडिथ ताज होटल के पास ही एक बंगाली म्यूज़िक वीडियो की शूटिंग कर रही थीं. वो कहती हैं, "मैं पिछले 18 महीने से यहां हूं.मैं मुंबई से प्यार करती हूं लेकिन ऐसी घटनाएं हों तो फिर डर लगने लगता है."

वो कहती हैं कि भारत की छवि और ख़ासकर मुंबई की छवि ख़राब करने के लिए ऐसे हमले किए जा रहे हैं. वो कहती हैं कि इससे नुकसान सभी को होता है.

 मैं पिछले 18 महीने से यहां हूं.मैं मुंबई से प्यार करती हूं लेकिन ऐसी घटनाएं हों तो फिर डर लगने लगता है
जर्मनी की जूडिथ

नुकसान की बात होते ही कोलाबा मार्केट में फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले नसीर भी आ जाते हैं और कहते हैं, "इससे तो हमें ही नुकसान होगा. हमारी दुकानें बंद हो गई हैं. पता नहीं कब खुलेंगी. पूरा टूरिज़्म बिजनेस चौपट हो जाएगा. पता नहीं कब तक पर्यटक इस घटना से डरते रहेंगे और मुंबई नहीं आएंगे."

ज़ाहिर है कि पर्यटकों के नहीं आने से दुकानदारों को ख़ासा नुकसान होगा और इसी कारण वो भी नाराज़ हैं. इस इलाके़ में कुछ और टूरिस्टों से जब हमारी बात हुई तो वो डरे हुए से दिखे.

एक ब्रितानी दंपत्ति ने माइक पर बात नहीं की लेकिन कहा कि वो जल्द से जल्द मुंबई छोड़ना चाहती हैं. ऐसा ही एक इसराइली दंपत्ति भी ख़ासा डरा हुआ दिखा जो एक ही दिन पहले मुंबई आया था.

धमाका किसने किया, फायरिंग किसने की, नुकसान किसका हुआ, क्यों हुआ. ये सारे सवाल आने वाले दिनों में पूछे जाएंगे लेकिन फिलहाल इतना तय है इससे विदेशी पर्यटक डरे हैं जिसका नुकसान पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को ज़रुर होगा.

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