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'इराक़ में भी इतना डर नहीं लगा था' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मुंबई के कोलाबा में हुए हमलों के समय इलाक़े में मौजूद इराक़ी नागरिक जमाल अलबक्श कहते हैं कि उन्हें इतना डर कभी इराक में भी नहीं लगा था जितना मुंबई में लग रहा है क्योंकि यह बिल्कुल अप्रत्याशित था. वो कहते हैं, "यह असली आतंकवाद है. बिल्कुल अप्रत्याशित था. मैंने कभी सोचा नहीं था कि कोलाबा जैसे इलाक़े में कभी लोग गोलियां चलाएंगे और बम फटेंगे. यहां तो बस पर्यटक रहते हैं." पूरी घटना को याद करते हुए जमाल कांप जाते हैं. वो कहते हैं, "मैं इराक़ में रहा हूं लेकिन वहां पता होता है कि किस इलाके़ में दिक्कत होगी वहां लोग नहीं जाते हैं. घर में रहते हैं लेकिन यहां तो कॉफी शॉप में गोलियां चल रही हैं. आप कहां सुरक्षित हैं. मुझे इतना डर तो कभी इराक़ में भी नहीं लगा जितना यहां लग रहा है.’" जमाल कहते हैं, "समझ में नहीं आता कि वो किसको निशाना बनाना चाहते थे. पर्यटकों को या फिर आम लोगों को. ऐसे में तो किसी को भी डर लगेगा अगर कोई सड़क पर आकर अंधाधुंध आप पर गोलियां चलाने लगे तो." जब लियोपोल्ड कैफ़े में गोलियां चल रही थीं तो जमाल के मित्र गफूर आसपास ही थे. गफूर तस्वीर नहीं खिंचवाना चाहते लेकिन पूरी बात बताते हैं. अप्रत्याशित वो कहते हैं, "वो दो लोग थे और उनके पास बड़े हथियार थे. रुसी थे शायद और वो ताबड़तोड़ गोलियां चला रहे थे और ऐसा नहीं था कि किसी को चुनकर मार रहे हो. वो सब पर गोलियां चला रहे थे.मेरे सामने उन्होंने दो लड़कियों पर गोलियां चलाईं." बगदाद के रहने वाले गफ़ूर कहते हैं कि दोनों हमलावर देखने में विदेशी थे और एक के बाल तो सुनहरे थे. वो कहते हैं, "एक के तो लंबे बाल थे और सुनहले थे. ये नहीं बता सकता कि किस देश के होंगे लेकिन उनकी त्वचा भारतीयों जैसी नहीं थी. वो बड़े आत्मविश्वास से चल रहे थे और आराम से गोलियां चला रहे थे." वो कहते हैं कि लियोपोल्ड की एक गली के पास गोली चलाने के बाद ये दोनों हमलावर ताज होटल की तरफ चले गए और फिर वहां से उन्होंने फायरिंग की आवाजें सुनीं. उल्लेखनीय है कि कुछ हमलावरों ने ताज होटल में धमाके किए और लोगों को बंधक बनाकर भी रखा है. जमाल की आवाज़ पूरी घटना बताते बताते कांपने लगती है. वो कहते हैं कि वो घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे लेकिन फिर भी उन्हें डर लग रहा है | इससे जुड़ी ख़बरें मुंबई में बड़े पैमाने पर चरमपंथी हमले, 80 मारे गए26 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस हमले देश के लिए चुनौती हैं: आडवाणी27 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस मुंबई: कई इलाकों में अचानक हुआ हमला27 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस मुंबई: होटलों में धमाके, कमांडो ऑपरेशन जारी27 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस भारत में हमलों की व्यापक निंदा27 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस केंद्र ने कमांडो और सेना के जवान भेजे26 नवंबर, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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