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गुरुवार, 11 सितंबर, 2008 को 18:00 GMT तक के समाचार
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बुश ने मनमोहन सिंह को आमंत्रण भेजा
मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश
भारत-अमरीका के बीच तीन साल पहले इस समझौते पर सहमति बनी थी
भारत-अमरीका परमाणु समझौते को संसद की स्वीकृति के लिए भेजने के बाद राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अमरीका आमंत्रित किया है.

दोनों नेता के बीच 25 सितंबर को मुलाक़ात होने की संभावना है.

अगर तब तक अमरीकी संसद ने इस समझौते को स्वीकृति दे दी तो संभावना है कि दोनों नेता समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर करें.

भारत-अमरीका परमाणु समझौते को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों (एनएसजी) की स्वीकृति पहले ही मिल चुकी है.

अब इस पर अमरीकी संसद की मुहर लगना ही शेष है जिसके लिए बुश प्रशासन और मनमोहन सिंह सरकार दोनों आश्वस्त नज़र आ रहे हैं.

आमंत्रण

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह संयुक्त राष्ट्र की की आमसभा में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क जाने वाले हैं, वहाँ से वे वॉशिंगटन जाएँगे.

 भारत-अमरीकी परमाणु समझौते को संसद की मंज़ूरी इसका अंतिम पड़ाव है और यह राष्ट्रपति बुश और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दोनों के लिए प्राथमिकता सूची से सबसे ऊपर है
डाना पैरिनो, व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार गुरुवार को अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव डाना पैरिनो ने कहा कि 25 सितंबर को जॉर्ज बुश और मनमोहन सिंह के बीच व्हाइट हाउस में मुलाक़ात होनी है.

उन्होंने कहा कि इस मुलाक़ात में दोनों देशों के रणनीतिक साझेदारी में मज़बूती के अलावा कृषि, शिक्षा, व्यापार और सैन्य मामलों में भी सहयोग बढ़ाने पर विचार होगा.

पैरिनो ने कहा, "राष्ट्रपति बुश अमरीकी संसद के साथ चर्चा कर रहे हैं कि भारत के साथ शांतिपूर्ण परमाणु समझौते को इसी साल संसद की मंज़ूरी दिलवाई जा सके."

उन्होंने कहा, "भारत-अमरीकी परमाणु समझौते को संसद की मंज़ूरी इसका अंतिम पड़ाव है और यह राष्ट्रपति बुश और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दोनों के लिए प्राथमिकता सूची से सबसे ऊपर है."

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने कहा, "इस समझौते को मंज़ूरी ऐतिहासिक उपलब्धि होगी और इससे परमाणु अप्रसार के अंतरराष्ट्रीय प्रयास और मज़बूत होंगे, इससे दोनों देशों में आर्थिक और व्यावसायिक अवसर मिलेंगे और भारत अपनी बढ़ती ऊर्जा ज़रूरतों की आपूर्ति पर्यावरणीय दृष्टि से ज़्यादा ज़िम्मेदारी के साथ पूरा कर सकेगा."

अख़बार'एटमी वनवास ख़त्म'
अधिकांश अख़बारों का मानना है कि एनएसजी से मंज़ूरी एक उपलब्धि है.
भारत का एक परमाणु संयंत्र'भारत ने पाया है'
के संथानम का कहना है कि समझौते से भारत ने पाया ही पाया है खोया कुछ नहीं.
भारत का एक परमाणु संयंत्र'भारत ने खोया है'
ब्रह्मा चेलानी कहते हैं कि समझौते से भारत के सामरिक विकल्प घट रहे हैं.
जॉर्ज बुश और मनमोहन सिंहपरमाणु करार का सफ़र
तारीख़ों के आईने में भारत-अमरीका असैन्य परमाणु समझौता...
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