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चीन ने मंज़ूरी का स्वागत किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) से परमाणु व्यापार की मंज़ूरी मिलने के बाद चीन ने अपने रुख़ में नरमी लाते हुए कहा है कि वह परमाणु समझौते का स्वागत करता है. भारत के दौरे पर आए चीन के विदेश मंत्री यांग जिएची ने सोमवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी से बातचीत की. इसके बाद उन्होंने एक बयान जारी कर कहा, "चीन उम्मीद करता है कि एनएसजी का फ़ैसला परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल और परमाणु अप्रसार पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने में मददगार साबित होगा." ग़ौरतलब है वियना में एनएसजी की बैठक के दौरान चीन ने भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर नकारात्मक रवैया अपनाया था और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एमके नारायणन ने इस पर नाखुशी जताई थी. शांतिपूर्ण इस्तेमाल लेकिन भारत दौरे पर आने के बाद चीनी विदश मंत्री ने रुख़ में नरमी के संकेत दिए. उनका कहना था, "चीन का मानना है कि सभी देशों को परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल का आधिकार है." यांग जिएची ने ये ज़रूर कहा कि इस तरह के समझौतों से अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार की व्यवस्था मज़बूत बनाने में मदद मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा, "चीन न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप की बैठकों में संरचनात्मक भूमिका निभाता रहा है." चीनी विदेश मंत्री के मुताबिक छह सितंबर को एनएसजी में भारत के साथ असैनिक परमाणु सहयोग पर बात हुई और सर्वसम्मति से परमाणु व्यापार पर लगी रोक हटाने का फ़ैसला हुआ. |
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