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भारत-चीन रिश्तेः कड़वाहट के संकेत? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लंबे समय तक कुछ स्याह सफ़ेद रिश्तों के बाद भारत चीन के बीच व्यापार की वजह से संबंध मधुर ही रहे हैं. पर पिछले दिनों भारत में चीनी दूतावास में तिब्बतियों के प्रदर्शन के कारण दोनों देशों के बीच रिश्ते लगता है कुछ गड़बड़ा गए हैं. बृहस्पतिवार दोपहर भारत के गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने दिल्ली में चीनी राजदूत से बातचीत की है और उन्हें सुरक्षा इंतजामों को लेकर मुतमईन रहने को कहा है. पिछले हफ्ते चीन ने ऐसा अंदेशा ज़ाहिर किया था कि कुछ तिब्बती संगठन उस समय व्यवधान डालने की तैयारी में है जब ओलंपिक मशाल भारत में हो. इक्कीस मार्च को अचानक कुछ चीन विरोधी तिब्बत से निर्वासित लोग दिल्ली के चीनी दूतावास में विरोध प्रदर्शन करते घुस गए थे. आक्रोश जताया दूतावास में प्रदर्शन के बाद नाख़ुश चीन ने पिछले शुक्रवार रात दो बजे चीन में भारत की राजदूत निरुपमा राव से कैफ़ियत तलब की और अपनी नाराज़गी का इजहार किया. दूसरे दिन निरुपमा राव को एक बार फ़िर दिन में बुलाया गया और उन्हें उन तिब्बती संगठनों की एक फेहरिस्त भी सौंपी गई जो भारत में चीन के ख़िलाफ़ बढ़ चढ़ कर प्रदर्शन कर सकते हैं. चीन में भारत के दूत रहे एलएल मेहरोत्रा का कहना है कि किसी राजदूत को रात में बुलाना एक आम बात नहीं है. वो बताते हैं कि पचास और साठ के दशक में ऐसा कई बार हुआ था की चीन ने रात को भारत के राजदूत को बुलाया. बदले में भारत ने भी कई बार चीन के राजदूत को ऐसे समय पर बुलाया और बातचीत की. पर ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच संबंध सुधर रहे हों तब ऐसा होना सामान्य बात नहीं है. गंभीर बात नहीं है हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय के बीजिंग प्रवक्ता चिंग गोंग ने इस बात से इनकार किया है भारतीय राजदूत को रात दो बजे बुलाना एक असाधारण बात थी. उनका कहना था कि उनका देश रात दिन काम कर रहा है और इसी के कारण भिन्न देशों के राजदूतों को भी अलग अलग समय पर बुलाया जा रहा है. इसके बाद अचानक भारत ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री कमल नाथ की चीन दौरा रद्द कर दिया है. हालांकि व्यापार सम्बन्धी इस दौरे की तारीखें काफी पहले से तय थीं पर कमल नाथ का कहना है कि ऐसा किसी विरोध के कारण नहीं किया गया है. उनका कहना था कि यह तो बस कुछ तारीखों के हेर फेर की वजह से हुआ है. अब देखना है क्या चीन इस सबसे संतुष्ट होता है या फिर कहानी में कुछ और मोड़ आना बाकी है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'तिब्बत मुद्दा ज़िंदगी और मौत का संघर्ष'19 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई थी'20 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस सुलगते तिब्बत पर भारत की ख़ामोशी22 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस 'तिब्बत पर भारत के रुख़ में बदलाव नहीं'23 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस श्रीनगर में निर्वासित तिब्बतियों का प्रदर्शन26 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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