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रविवार, 23 मार्च, 2008 को 23:44 GMT तक के समाचार
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'तिब्बत पर भारत के रुख़ में बदलाव नहीं'
मनमोहन सिंह और वेन जियाबाओ
हाल के वर्षों में चीन के साथ भारत के रिश्ते सुधरे हैं
भारत ने चीन को आश्वासन दिया है कि तिब्बत मामले पर उसका रुख़ स्पष्ट और एकरूप है. चीन के विदेश मंत्रालय ने यह जानकारी दी है.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क़ीन गांग ने कहा कि भविष्य में भी तिब्बत मामले में भारत के रुख़ में कोई बदलाव नहीं आएगा.

उन्होंने कहा कि भारत तिब्बत को चीन का अंदरुनी मामला मानता है और उसने चीन को इसका भरोसा दिलाया है कि उसके रुख़ में कोई बदलाव नहीं आया है.

क़ीन गांग के मुताबिक़ भारत ने यह भी स्पष्ट किया है कि उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी और तिब्बतियों के धार्मिक नेता दलाई लामा के बीच कोई मुलाक़ात की योजना नहीं है.

प्रदर्शन

दलाई लामा भारत के धर्मशाला शहर में रहते हैं और वे तिब्बतियों की निर्वासित सरकार का नेतृत्व करते हैं. 10 मार्च को तिब्बत में बड़े पैमाने पर चीन विरोधी प्रदर्शन हुए थे.

भारत में भी चीन विरोधी प्रदर्शन हुए हैं

लेकिन उसके बाद चीन सरकार ने प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की. चीन का दावा है कि हिंसा में 19 लोग मारे गए हैं लेकिन तिब्बत की निर्वासित सरकार मरने वालों की संख्या 100 बताती है.

पिछले दिनों अमरीकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पलोसी ने धर्मशाला जाकर दलाई लामा से मुलाक़ात की थी और चीन विरोधी बयान दिए थे. इस पर चीन ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

पलोसी ने तिब्बत में हुई हिंसा की स्वतंत्र जाँच कराने की मांग की थी और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की थी कि वे चीन की निंदा करें. इस पर चीन का कहना था कि ये उसके अंदरुनी मामले में हस्तक्षेप है.

धर्मशाला और भारत के कई हिस्सों में नियमित चीन विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. पिछले दिनों तो कई तिब्बती प्रदर्शनकारी दिल्ली स्थिति चीनी दूतावास में घुस गए थे. बाद में पुलिस ने उन्हें वहाँ से खदेड़ा.

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