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शुक्रवार, 21 मार्च, 2008 को 07:04 GMT तक के समाचार
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चीन की निंदा करे दुनिया: पलोसी
नैन्सी पलोसी
पलोसी के साथ प्रतिनिधि सभा के नौ अन्य सदस्य भी भारत आए हैं
अमरीका में प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पलोसी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे तिब्बत में चीन के शासन की निंदा करे. उन्होंने तिब्बत में हुई हिंसा की स्वतंत्र जाँच की मांग की है.

धर्मशाला में उन्होंने तिब्बतियों के शीर्ष धार्मिक गुरु दलाई लामा से मुलाक़ात की. इस बीच तिब्बत में कई दिनों तक चले विरोध प्रदर्शनों के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है.

चीन तिब्बत में हुई हिंसा के लिए दलाई लामा को ज़िम्मेदार ठहराता है.

धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाक़ात के बाद पलोसी ने कहा, "अगर दुनियाभर में आज़ादी का समर्थन करने वाले लोग चीन के ख़िलाफ़ नहीं बोले तो हम मानवाधिकार पर कुछ कहने का नैतिक अधिकार भी खो देंगे."

प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पलोसी की धर्मशाला यात्रा तिब्बत में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों से पहले से ही तय थी.

गुरुवार को पहली बार चीन ने यह स्वीकार किया था कि उसके सैनिकों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई और इसमें कई लोग घायल भी हुए. ल्हासा में चीन विरोधी प्रदर्शन 10 मार्च को शुरू हुए थे.

अमरीका की विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने भी चीन के नेताओं से अनुरोध किया है कि वे तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा के साथ बातचीत शुरू करें.

उधर तिब्बत में प्रदर्शनों के बाद बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती जारी है. एक बीबीसी संवाददाता का कहना है कि उन्होंने गान्सु प्रांत की राजधानी में चारो ओर सुरक्षाबलों के नाके लगे देखे हैं.

तिब्बत में प्रदर्शन 10 मार्च को शुरु हुए थे जब दुनिया भर में रह रहे तिब्बतियों ने चीनी शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह की 49वीं वर्षगाँठ मनाई थी.

चीन ने गुरुवार को पहली बार स्वीकार किया है कि सुरक्षाबलों ने तिब्बती प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई थीं.

'अमरीका तिब्बतियों के साथ'

 यदि दुनिया में आज़ादी चाहने वाले लोग चीन के दमनचक्र की बारे में और तिब्बत के बारे में अब भी बात नहीं करते, तो हमें विश्व में कहीं भी मानवाधिकारों के बारे में बात करने का अधिकार नहीं होगा
अमरीकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष पलोसी

नैन्सी पलोसी ने धर्मशाला में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, "यदि दुनिया में आज़ादी चाहने वाले लोग चीन के दमनचक्र की बारे में और तिब्बत के बारे में अब भी बात नहीं करते, तो हमें विश्व में कहीं भी मानवाधिकारों के बारे में बात करने का अधिकार नहीं होगा."

उनका कहना था कि इस दुखद समय में अमरीका तिब्बत के लोगों के साथ है. उन्होंने ये भी कहा कि दुनिया में जो लोग भी आज़ादी का समर्थन करते हैं उन्हें इस समय अपनी आवाज़ बुलंद करनी चाहिए.

उनका ये भी कहना था कि वे 'इस चुनौती का सामना करने के लिए तिब्बतियों के साथ हैं.'

उनका कहना था कि ये पता चलना चाहिए कि तिब्बत में क्या हो रहा है और ये ज़रूरी है कि दुनिया के सामने सच आए.

हालाँकि नैन्सी पलोसी की यात्रा प्रदर्शनों से कई हफ़्ते पहले ही तय हो गई थी लेकिन बीबीसी संवाददाता डेमियन ग्रेमेटिकस के अनुसार दलाई लामा के समर्थक नैन्स पलोसी की इस यात्रा को अमरीका की ओर से मिल रही सहानुभूति के तौर पर देख रहे हैं.

अन्य पर्यवेक्षक नैन्सी पलोसी के विचारों को तिब्बत में प्रदर्शनकारियों के लिए एक प्रमुख अमरीकी नेता की हिमायत के तौर पर देख रहे हैं.

चीन नैन्स पलोसी की दलाई लामा के साथ मुलाक़ात का विरोध कर चुका है और माना जा रहा है कि चीन की सरकार की उनकी इस यात्रा पर नज़र है.

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