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'प्रदर्शनकारियों की भावना समझनी होगी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तिब्बत में हो रहे प्रदर्शनों पर तीख़ी प्रतिक्रिया देते हुए चीन के अधिकारियों ने कहा है कि चीन विरोधी प्रदर्शनकारियों को बख़्शा नहीं जाएगा. इस बीच दलाई लामा दिल्ली में है. उनके प्रवक्ता ने कहा है वे हिंसा को सही नहीं मानते पर समझ सकते हैं कि लोग ऐसा क्यों कर रहे हैं. प्रवक्ता ने दलाई लामा का बयान पढ़ते हुए कहा, "प्रदर्शनकारी जो कर रहे हैं मैं उससे सहमत तो नहीं हूँ लेकिन सबको समझना चाहिए कि वे लोग कैसा महसूस कर रहें होंगे और वे अपनी खुशी से प्रदर्शन नहीं कर रहे. अगर वे प्रदर्शन कर रहे हैं तो इसका परिणाम भी जानते हैं, लेकिन भावनाओं के चलते उन्होंने ऐसा किया है." इससे पहले चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अख़बार पीपल्स डेली में लिखा गया था कि हिंसा के लिए ज़िम्मेदार मुठ्ठी भर लोगों को कड़ी सज़ा मिलेगी. 'तिब्बत अंदरूनी मामला' चीन का कहना है कि तिब्बत चीन का अंदरूनी मामला है और वह किसी भी देश, संगठन और व्यक्ति की ओर से चीन के अंदरूनी मामलों में दख़ल बर्दाश्त नहीं करेगा. ये बात भारत में चीन के राजदूत ज़ांग यान ने दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही. उनका कहना था, "इस मुद्दे पर हम स्पष्ट कह चुके हैं कि तिब्बत चीन का अंदरूनी मामला है. हम किसी को भी चीन के अंदरूनी मामलों में दख़ल देने की इजाज़त नहीं देते हैं. चीन में समस्या पैदा करने की कोशिशें नाकाम रहेंगी." पत्रकारों से बातचीत में चीनी राजदूत का कहना था, "हम चीन के अंदरूनी मामलों में किसी भी देश, संगठन या व्यक्ति के दख़ल का विरोध करते हैं. किसी भी देश, संगठन या व्यक्ति को तिब्बत की स्थिति के बारे में ग़ैरज़िम्मेदार हरकत नहीं करनी चाहिए और ग़ैरज़िम्मेदार शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए." अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया चीन की प्रतिक्रिया अमरीकी प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैन्सी पलोसी के शुक्रवार के उस बयान के बाद आई है जिसमें उन्होंने 'तिब्बत की स्थिति को अंतरराष्ट्रीय समुदाय की अंतरात्मा के लिए चुनौती' बताया था. धर्मशाला में दलाई लामा से मुलाक़ात के बाद पलोसी ने कहा था, "अगर दुनियाभर में आज़ादी का समर्थन करने वाले लोग चीन के ख़िलाफ़ नहीं बोले तो हम मानवाधिकार पर कुछ कहने का नैतिक अधिकार भी खो देंगे." तिब्बत में और दुनिया में अन्य जगहों पर 10 मार्च को तिब्बतियों ने चीनी शासन के ख़िलाफ़ विद्रोह की 49वीं वर्षगाँठ मनाई थी. इसके बाद तिब्बत, चीन के कुछ अन्य प्रांतो और उत्तर भारत में कुछ जगह तिब्बतियों के प्रदर्शन शुरु हो गए थे. गुरुवार को पहली बार चीन ने यह स्वीकार किया था कि उसके सैनिकों ने ल्हासा में प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चलाई और इसमें कई लोग घायल भी हुए. उधर तिब्बत में बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती जारी है. विशेष तौर पर सैनिकों के पश्चिमी तिब्बत में भेजा जा रहा है ताकि वहाँ चल रही हिंसा पर काबू पाया जा सके. सरकार ने इंटरनेट पर 20 ऐसे लोगों की तस्वीरें छापी हैं जो उसके अनुसार पिछले हफ़्ते वहाँ हुए दंगों में सक्रिय थे. इन लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरे में डालने, लूटपाट और हिंसा करने के आरोप लगाए गए हैं. चीन की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार 20 में से दो लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया है जबकि एक ने आत्मसमर्पण कर दिया है. |
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