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गुरुवार, 04 सितंबर, 2008 को 14:12 GMT तक के समाचार
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बाढ़ के बाद अब जल दस्युओं का आतंक

एक बाढ़ से प्रभावित इलाक़ा
बाढ़ पीड़ितों को अब यह चिंता सता रही है कि उनका घर सुरक्षित बचा है या नहीं
बिहार के बाढ़ग्रस्त इलाक़ों में सुरक्षा मुहैया कराना बड़ी समस्या साबित हो रही है क्योंकि पानी भरने के साथ ही जल दस्युओं का आतंक फैलता जा रहा है.

बाढ़ के कारण लोग अपना घर-बार छोड़कर राहत शिविरों में आ गए हैं लेकिन कई लोग ऐसे भी हैं जो मवेशी और अपने क़ीमती सामान के साथ ऊंचे स्थानों पर रुके हुए हैं.

इन्हीं में कुछ ऐसे असामाजिक तत्व भी शामिल हैं जो इस त्रासदी के दौरान भी लूटपाट में लगे हुए हैं.

घर-बार की चिंता

सुरसर बचाव केंद्र पर कई लोगों ने हमसे सुरक्षा की समस्या बताई. कई लोग पानी भरे होने के बावजूद वापस जाकर अपना घर-बार देखना चाहते थे.

ऐसे ही एक व्यक्ति जमनानंद मिश्र दो दिन से बचावकर्मियों से आग्रह कर रहे हैं कि उन्हें नाव से अपने घर की ओर ले जाया जाए.

वे कहते हैं, "हम लोग बस एक ताला लगाकर भाग आए थे. अब पता चल रहा है कि हमारे गांव में छोटी नौका पर असमाजिक तत्व घूम रहे हैं और लूटपाट कर रहे हैं. मेरे घर में बहुत सामान था. बाढ़ में तो बर्बादी हुई है जो बचा है चोर ले जा रहे हैं. मैंने सरकारी काम के लिए अपनी गाड़ी दी है लेकिन मुझे कोई मदद नहीं मिल रही है. कई घरों में लूटपाट की गई है और पुलिस को सबकुछ पता है."

 हम लोग बस एक ताला लगाकर भाग आए थे. अब पता चल रहा है कि हमारे गांव में छोटी नौका पर असमाजिक तत्व घूम रहे हैं और लूटपाट कर रहे हैं.
जमनानंद मिश्र

जब मैंने वहाँ खड़े और लोगों से इस बारे में पूछा तो लोगों ने स्पष्ट कहा कि चोर-लुटेरों का आतंक फैला हुआ है और चोरियां हो रही हैं. जिससे लोग डरे हुए हैं.

ऐसे ही एक युवक अजय कुमार कहते हैं, "हम बलुआ बाज़ार के हैं. फ़ोन पर वहाँ लोगों से बात होती है तो वे बताते हैं कि घरों के ताले तोड़े जा रहे है. चोरियाँ हो रही हैं. हमारे घरों में सामान है. वो सब ले जाया जा रहा है."

एक समाजसेवी संस्था से जुड़े शिशिर मिश्र सरकारी लोगों के साथ मिलकर बचाव और राहत कार्यों में मदद कर रहे हैं. वह भी इस दिक्कत की पुष्टि करते हैं.

शिशिर कहते हैं, "इस तरह की शिकायतें आ रही हैं. असल में गांवों में कुछ असामाजिक तत्व हैं जिनके पास नाव है. वो दिन भर नाव बाँधे रखते हैं और रात में उसकी मदद से चोरियाँ करते हैं. पुलिस से शिकायत भी की गई है. "

उधर आपदा प्रबंधन समिति के एक सदस्य पुलिस का बचाव करते हैं और कहते हैं कि पुलिस के पास रात में गश्ती के लिए न तो विशेष नाव है और न ही सर्चलाइट इत्यादि की ही सुविधा है. ऐसे में पुलिस से कोई उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्योंकि उनको सुविधा ही नहीं दी गई है.

पुलिस की दलील

इस बातचीत के दौरान स्थानीय पुलिस अधिकारी भी वहाँ मौजूद थे. डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) शिव पूजन सिंह से जब मैंने सुरक्षा की समस्या के बारे में पूछा तो उनका कहना था, "ऐसी कोई समस्या नहीं है. एक शिकायत आई थी तो हमने कार्रवाई की है और गिरफ़्तारी हुई है."

वह कहते हैं, "ऐसा नहीं कह सकते कि जल दस्युओं का आतंक है बल्कि कुछ लोग हैं जो दिन में लोगों को ढोते हैं और रात में मौका पाने पर चोरियां कर रहे हैं. हम कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें रोका जाए."

 ऐसी कोई समस्या नहीं है. एक शिकायत आई थी तो हमने कार्रवाई की है और गिरफ़्तारी हुई है. ऐसा नहीं कह सकते कि जल दस्युओं का आतंक है बल्कि कुछ लोग हैं जो दिन में लोगों को ढोते हैं और रात में मौका पाने पर चोरियां कर रहे हैं.
शिवपूजन सिंह, डीएसपी

पुलिस अधिकारी की बात से थोड़ा आश्वस्त होता इससे पहले दो लोगों ने मुझे अपनी तरफ़ बुलाया. इनमें से एक वकील थे और एक स्थानीय पत्रकार.

पेशे से वकील राजेश चंद्र वर्मा ने छूटते ही कहा आपने बिल्कुल सही सवाल किया है यहां पर सुरक्षा की स्थिति बेहद ख़राब हो गई है. उन्होंने बताया, "यह बिल्कुल सही बात है. चोर-डकैतों ने आतंक मचाया हुआ है. इसके लिए विशेष उपाय करने होंगे सरकार को क्योंकि असामाजिक तत्वों के पास अपनी नाव है जिसका वो ग़लत फ़ायदा उठा रहे हैं."

हालांकि कुछ अधिकारियों ने ये तर्क भी दिया कि अब बाढ़ में बचा ही क्या है घरों में जो चोर लूट ले जाएं. ये तर्क मेरे गले नहीं उतर रहा था क्योंकि कई घर ऐसे हैं जिनमें पानी नहीं घुसा है और इनमें बर्तन और कई अन्य प्रकार का सामान है, जो चुराया जा सकता है.

बाढ़ की पीड़ा से लोग बेहाल हैं और ऐसे में चोरों की लूटपाट राहत एवं बचाव कार्य में बड़ी मुश्किलें पैदा कर रही है.

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