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दस फ्रांसीसी सैनिक मारे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
काबुल के पास नैटो के एक गश्ती दल पर घात लगाकर किए गए हमले में कम-से-कम दस फ्रांसीसी सैनिक मारे गए हैं. यह मुठभेड़ जहां हुई है उसे तालेबान के प्रभाव वाला इलाक़ा माना जा रहा है. फ्रांसीसी राष्ट्रपति निकोला सर्कोज़ी के कार्यालय ने घोषणा की है कि वे अफ़ग़ानिस्तान रवाना हो रहे हैं. ये फ्रांसीसी सैनिक नैटो की अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और सहयोग सेना के सदस्य थे. माना जा रहा है कि हमलावरों ने घात लगाकर हमला किया जिसके बाद ज़बर्दस्त गोलाबारी हुई और ये सैनिक मारे गए. यह हमला सोमवार को हुआ जिसके बाद मुठभेड़ जारी रही. यह पहला मौक़ा है जब इतनी बड़ी संख्या में फ्रांसीसी सैनिक अफ़ग़ानिस्तान में मारे गए हैं. काबुल में पिछले कुछ दिनों में सुरक्षा में बढ़ोतरी हुई है लेकिन अब लगातार धमाके हो रहे हैं. इस बीच कंधार के दक्षिणी प्रांत में नैटो का एक ट्रक सड़क के पास बम धमाके की चपेट में आ गया. उधर खोस्त प्रांत में नैटो के एक हमले में छह आत्मघाती हमलावर मारे गए. काबुल में बीबीसी संवाददाता एलेस्टेर लीथहेड का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में काबुल में ऐसी घटनाएं आम हो गई हैं और सुरक्षा स्थिति बिगड़ गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें काबुल में कार आत्मघाती हमला05 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस यूरोपीय अधिकारी अफ़ग़ानिस्तान से गए27 दिसंबर, 2007 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में एक भारतीय की मौत03 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस काबुल में कार बम फटा, छह मरे13 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस कंधार में धमाका, दस से ज़्यादा मरे17 फ़रवरी, 2008 | भारत और पड़ोस हमले में बाल-बाल बचे राष्ट्रपति करज़ई27 अप्रैल, 2008 | भारत और पड़ोस भारतीय विदेश सचिव काबुल दौरे पर13 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'हमलों के लिए आईएसआई ज़िम्मेदार'14 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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