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गुरुवार, 14 अगस्त, 2008 को 08:05 GMT तक के समाचार
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महिला राहतकर्मियों की हत्या
अफ़गानिस्तान
राहत कर्मियों की गाड़ी पर उनके संगठन का नाम लिखा हुआ था इसके बावजूद इस पर हमला हुआ
अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के नज़दीक लोगार प्रांत में तालेबान चरमपंथियों ने तीन विदेशी महिला राहत कर्मियों और एक स्थानीय ड्राइवर की हत्या कर दी है.

ये तीनों ही महिलाएँ अंतरराष्ट्रीय राहत समिति यानी इंटरनेशनल रेस्क्यु कमेटी(आईआरसी) की कार्यकर्ता थीं.

इनमें से एक कनाडा, एक ब्रिटेन-कनाडा और एक त्रिनिदाद-अमरीका की नागरिक थीं. ये तीनों राहतकर्मी काबुल में राहत कार्यों में जुटी हुई थीं.

काबुल के क़रीब लोगार प्रांत में पाँच तालेबान चरमपंथियों ने अपनी क्लैशिनकोव रायफ़लों से इनकी गाड़ियों पर हमला कर दिया.

तालेबान के प्रवक्ता का कहना है कि ये तीनों महिलाएँ विदेशी जासूस थीं. मारी गई तीनों महिलाएँ गार्देज़ से आ रही थीं तभी उनकी गाड़ियों पर हमला किया गया.

हालांकि इनकी गाड़ियों पर साफ़-साफ़ आईआरसी लिखा हुआ था पर तालेबान हमलावरों ने इन्हें अपना निशाना बना लिया.

लोगार प्रांत में आतंकवाद निरोधी विभाग के उपनिदेशक अब्दुल्ला ख़ान ने इस हमले में घायल आईआरसी के एक अफ़गानी कर्मचारी के हवाले से बताया कि तालेबान के पाँच लड़ाके एक गाँव से निकलकर आए और उन्होंने आईआरसी की गाड़ियों पर गोलियाँ चलाना शुरू कर दिया.

राहत सेवाएँ ठप

इस हमले के बाद आईआरसी ने बताया कि उन्होंने पूरे अफ़ग़ानिस्तान में अपनी राहत सेवाएँ बंद कर दी हैं. आईआरसी पिछले बीस बरसों से अफ़ग़ानिस्तान में अपनी सेवाएँ दे रहा है.

तालेबान के प्रवक्ता ज़ैबुल्लाह मुजाहिद के मुताबिक तालेबान चरमपंथियों ने ये हमला ‘विदेशी हमलावरों’ पर किया है.

अफ़ग़ानिस्तान में राहत कार्य में लगे लोगों को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. कभी इन पर हमला होता है तो कभी इनका अपहरण कर लिया जाता है और इन्हें मार भी दिया जाता है.

पिछले कुछ समय से असुरक्षा की वजह से अंतरराष्ट्रीय राहत समूह अफ़ग़ानिस्तान के दक्षिणी प्रांतों में काम नहीं कर पा रहे हैं और हिंसा की घटनाएं दक्षिणी इलाक़े के अलावा आसपास के इलाक़ों में भी बढ़ रही हैं.

आम तौर पर शांत रहने वाला लोगार प्रांत पिछले कुछ महीनों में अशांत रहने लगा है. बीबीसी संवाददाता के अनुसार संयुक्त राष्ट्र ने इस इलाक़े को अफ़ग़ानिस्तान के अति-असुरक्षित क्षेत्रों में शामिल किया है. अब तक राहत का काम कर रहे 19 कार्यकर्ता मारे जा चुके हैं.

अफ़ग़ानिस्तान में राहत का काम देख रही संस्था एसीबीएआर(अफ़ग़ानिस्तान कोऑर्डिनेटिंग बॉडी फॉर अफ़ग़ान रिलीफ़) के अनुसार इस साल अब तक 2500 लोग मारे जा चुके हैं जिनमें 1000 आम नागरिक हैं.

पिछले दिनों अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति और दूसरे अधिकारी ये लगातार कहते रहे हैं कि अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे पाकिस्तान के कबायली इलाकों से उनके देश पर हमले किए जाते हैं.

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