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हिंसा से चिंतित राहत एजेंसियाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अफ़ग़ानिस्तान में काम कर रहीं सहायता एजेंसियों ने कहा है कि वे बढ़ती हिंसा के कारण देश के कई हिस्सों में काम नहीं कर सकेंगीं. लगभग 100 सहायता एजेंसियों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पिछले साल की तुलना में चरमपंथी हमलों में 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. उनका कहना है कि सहायता एजेंसियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. अपने बयान में इन एजेंसियों ने कहा है, "पहले जो इलाक़े सुरक्षित समझे जाते थे, ख़ास तौर पर काबुल के नज़दीक के इलाक़े, वहाँ भी हिंसा में वृद्धि हुई है." उनका कहना है कि नागरिकों पर हमले बढ़े हैं और जून के महीने में तो सहायता एजेंसियों पर इतने हमले हुए हैं जितने तालेबान सरकार के गिरने के बाद कभी नहीं हुए थे. इस 100 सहायता एजेंसियों में ऑक्सफ़ैम भी एक है. ऑक्सफ़ैम के नीति सलाहकार मैट वैडमैन कहते हैं, "सूखे और लगातार बढ़ती क़ीमतों के कारण और अधिक सहायता की ज़रुरत होगी लेकिन असुरक्षा के चलते सहायता एजेंसियाँ वहाँ सहायता नहीं पहुँचा सकेंगी." इस वर्ष अब तक 19 सहायताकर्मियों की हत्या हो गई है. पिछले साल मारे गए सहायताकर्मियों की कुल संख्या भी इससे कम थी. और कड़े शब्दों वाले इस बयान में कहा गया है कि सहायताकर्मियों के मारे जाने के लिए सिर्फ़ विद्रोही दोषी नहीं है, उन्होंने विदेशी सेना की ओर इशारा करते हुए कहा है कि उन्होंने भी हवाई हमले 40 प्रतिशत बढ़ा दिए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें अफ़ग़ान राहत योजना में बदलाव होगा06 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में सैनिकों पर बढ़ते हमले01 जुलाई, 2008 | भारत और पड़ोस 'अफ़ग़ानिस्तान में दानदाता वादे से पलटे'25 मार्च, 2008 | भारत और पड़ोस अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा, 45 की मौत17 नवंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'ब्रिटेन ने मदद का वादा पूरा नहीं किया'23 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस सहायता प्रयास बढ़ाने का आहवान31 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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