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अमर सिंह ने आडवाणी पर निशाना साधा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लालकृष्ण आडवाणी की टिप्पणी से नाराज़ समाजवादी पार्टी नेता अमर सिंह ने उन पर जवाबी हमला करते हुए कहा है कि 'राजनीतिक दलाली में भाजपा को महारत' है. मंगलवार को दिल्ली में पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने वामपंथी दलों और बहुजन समाज पार्टी को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अब तीनों (भाजपा-बसपा और वापमंथी) एक हो गए हैं. अमर सिंह ने लालकृष्ण आडवाणी की किताब और जसवंत सिंह की दो मुलाक़ातों का ज़िक्र करते हुए कहा कि 'दलाल सलाम करने में तो भाजपा को कांग्रेस से भी वरिष्ठता हासिल है'. उन्होंने कहा, "लाल और भगवा अब एक हो गए हैं और दोनों ही इसे उचित भी ठहरा रहे हैं." समाजवादी पार्टी के नेता का कहना था, "लालकृष्ण आडवाणी ने मुझे दलाल कहा है और इसके लिए मैं उनका कृतज्ञ हूँ क्योंकि ऐसा करके 80 साल के वरिष्ठ नेता और भावी प्रधानमंत्री ने मेरे जैसे छोटे आदमी को अपने बराबर में रख लिया है." लाल-भगवा-हाथी एक उन्होंने आडवाणी की किताब 'माई कंट्री माई लाइफ़' का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसमें आडवाणी जी ने स्वीकार किया है कि वे किस तरह सरकार गिराने में लगे रहे हैं. उनका कहना था कि लालकृष्ण आडवानी ने एक बार नहीं दो बार पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह को इस दलाल (अमर सिंह) के पास भेजा. अमर सिंह ने कहा, "पहली बार जयललिता के साथ होटल मौर्या में मुलायम सिंह को प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव आया था और दूसरी बार इसी महीने की दो तारीख़ को उन्होंने कहा कि लाल-भगवा-हाथी सब एक हैं और अब साइकिल की सवारी भी हो सकती है." 'माई कंट्री माई लाइफ़' की प्रति पत्रकारों को दिखाते हुए उन्होंने कहा कि आडवाणी जी ने फ़ोन करके उन्हें विमोचन के समारोह में बुलाया था लेकिन वे इसमें नहीं गए थे. उनका कहना है कि 23 मार्च 2008 को आडवाणी ने अपने हस्ताक्षर से यह किताब इस दलाल को भेजी थी. अमर सिंह का सवाल था, "23 मार्च तक मैं दलाल नहीं था लेकिन एकाएक मैं दलाल हो गया." उन्होंने कहा, "लाल-भगवा और हाथी तीनों मिलकर मुझे हलाल करना चाहते हैं." सांप्रदायिक ताक़तों से दूरी के संबंध में उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी पहले भी लाल सलाम करती आई है और आगे भी कहती रहेगी. |
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