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गूजरों को विशेष आरक्षण | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान में लगभग चार हफ़्ते पुराने गूजर आंदोलन का समाधान निकाल लिया गया है. राज्य सरकार गूजरों के लिए अतिपिछड़ा वर्ग की विशेष श्रेणी बनाकर उनके लिए पाँच प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान करने पर सहमत हो गई है. महत्वपूर्ण है कि इसी विशेष श्रेणी में आरक्षण का लाभ गूजरों के साथ-साथ तीन अन्य जातियों - गाड़िए लुहार, बंजारा और रहबर को मिलेगा. गूजर इस समय अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल हैं और प्राप्त जानकारी के अनुसार वे उस श्रेणी में भी आरक्षण का लाभ उठाते रहेंगे. आर्थिक तौर पर पिछड़ों को आरक्षण मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने पत्रकारों को बताया, "मुझे संतोष है कि आंदोलन का दौर समाप्त हो गया है. जो आरक्षण दिया जा रहा है उससे जो वर्ग वर्तमान में आरक्षण की सुविधा का लाभ उठा रहे हैं, उन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा. आज की आवश्यकता है कि कुछ वर्गों को विशेष सुविधा दी जाए." ग़ौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने चार जातियों - ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ और बनियों में आर्थिक दृष्टि से पिछड़े लोगों की स्थिति सुधारने के लिए पहले से शशिकांत आयोग गठित कर रखा है. इस आयोग की सिफ़ारिश पर इन जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 14 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान की भी धोषणा की गई है. नए सवाल खड़े हुए
फ़िलहाल इन घोषणाओं के बाद कुछ प्रमुख मुद्दे स्पष्ट नहीं हुए हैं. भारत का सुप्रीम कोर्ट पहले ही अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कुल 49.5 प्रतिशत के आरक्षण का आदेश दे चुका है और साथ ही 50 प्रतिशत से ज़्यादा आरक्षण को असंवैधानिक बता चुका है. इस संदर्भ में राजस्थान में अतिपिछड़ा वर्ग की विशेष श्रेणी के तहत पाँच प्रतिशत और चार तथाकथित उच्च जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए अलग से 14 प्रतिशत आरक्षण संवैधानिक दृष्टि से स्वीकार्य होगा या नहीं, यह एक बड़ा मुद्दा है. 'ऐतिहासिक घोषणा' एक प्रमुख गूजर नेता एसएस जॉनपुरिया ने बीबीसी को बताया, "ये सही है कि हमें जनजाति का दर्जा नहीं मिला लेकिन वो एक लंबी प्रक्रिया है. उसके लिए संघर्ष जारी रहेगा. लेकिन संतोष है कि राज्य सरकार केंद्र को पत्र लिखकर राज्य में गूजरों की स्थिति स्पष्ट करने को तैयार हो गई है." राजस्थान केंद्र की ओर से कई महीने पहले आए एक पत्र के उत्तर में राज्य में गूजरों की स्थिति को स्पष्ट करने पर भी तैयार हो गई है. बुधवार दोपहर को गूजर आंदोलन के नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मुलाक़ात की और उसके बाद ही नई व्यवस्था के बारे में घोषणा की गई. बैंसला ने कहा, "यह एक ऐतिहासिक घोषणा है और इसका श्रेय मुख्यमंत्री को जाता है. मेरे पास उनका शुक्रिया अदा करने के लिए शब्द नहीं हैं." उन्होंने ये भी कहा, "इस असहयोग आंदोलन के दौरान देशवासियों को जो मुश्किलों का सामना करना पड़ा है उसके लिए मैं क्षमा माँगता हूँ." जब उनसे आंदोलन वापस लेने की घोषणा करने के बारे में कहा गया तो बैंसला का कहना था कि आंदोलन वापस लेने की घोषणा बयाना में पीलूपुरा में की जाएगी. मंगलवार रात को राजस्थान की राजधानी जयपुर में गूजरों की ओर से निर्णायक दौर की वार्ता की अगुआई कर रहे कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने एक 'समझौते' होने की घोषणा की थी और इसे 'गूजरों की ऐतिहासिक जीत' बताया था. लेकिन उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया था. |
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