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आरक्षण पर शुरूआती प्रतिक्रिया नपीतुली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान में गूजरों और पाँच फ़ीसदी और उच्च जातियों के गरीबों को 14 फ़ीसदी आरक्षण की घोषणा को लेकर शुरूआती राजनीतिक प्रतिक्रिया सतर्क और नपीतुली है. राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौर का कहना है की ये गरीबों के आंसू पोछने की कवायद है. राज्य के दौसा ज़िले से कांग्रेस संसद सचिन पायलट का कहना है की इससे सामान्य वर्ग के लोगों को कमी का सामना करना पड़ सकता है. बीबीसी से बात करते हुए राठौर ने गूजरों को विशेष आरक्षण देने के राज्य सरकार के फैसले को न्यायोचित ठहराया. उन्होंने कहा कि "पूर्व में आरक्षित सभी समुदायों को बिना प्रभावित किए हुए ये आरक्षण दिया गया है. इसमे किसी के कोटे को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है. इसीलिए अब हम पचास प्रतिशत की आरक्षण व्यवयस्था से आगे निकलेंगे". राठौर ने ये भी बताया कि राज्य सरकार केंद्र सरकार से अपने इस फ़ैसले को संविधान की नौवीं अनुसूची में डालने का आग्रह करेगी ताकि इस फ़ैसले की न्यायिक समीक्षा न हो पाए. राठौर ने कहा कि सवर्ण गरीबों को 14 प्रतिशत आरक्षण देने से उनके भीतर गूजरों को विशेष आरक्षण देने पर गुस्सा नहीं पनपेगा. आरक्षण की इन नई घोषणाओं के बाद राज्य में अब आरक्षण का कुल प्रतिशत 68 हो जाएगा.
दौसा से कांग्रेस सांसद और गूजर नेता सचिन पायलट कहते हैं, " ये निश्चित है कि ऐसे में सामान्य वर्ग को कहीं ना कहीं कमी का सामना करना पड़ेगा. मुझे यह नहीं पता कि इस मुद्दे पर माननीय न्यायालय की क्या भूमिका होगी". पायलट ने बीबीसी से बात बात करते हुए कहा की गूजरों को आरक्षण उन्हें सिर्फ़ एक तोहफ़ा देने की कोशिश की गई है आंदोलन रोकने के लिए. उन्होंने कहा "राज्य सरकार ने गूजरों कि अनुसूचित जाती में शामिल करने की माँग को गंभीरता से नहीं लिया है." पायलट ने ज़ोर देकर कहा, " मेरी व्यक्तिगत राय यह है कि यदि आरक्षण हो तो वह आर्थिक आधार पर हो, वह जन्मजात न हो." | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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