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शुक्रवार, 23 मई, 2008 को 17:21 GMT तक के समाचार
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पुलिस फ़ायरिंग की न्यायिक जाँच होगी

गुर्जर आंदोलनकारी (फ़ाइल फ़ोटो)
गुर्जरों के आंदोलन ने पिछले साल भी हिंसक रुप ले लिया था
राजस्थान सरकार ने शुक्रवार को बयाना में गुर्जरों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस फ़ायरिंग की न्यायिक जाँच करवाने की घोषणा की है.

हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने सेना को सतर्क रहने को कहा है.

इसमें 13 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बर है जिसमें एक पुलिस कर्मी शामिल है. हालांकि सरकार ने मरने वालों की संख्या के बारे में देर रात तक कोई सूचना नहीं दी थी.

उल्लेखनीय है कि गुर्जरों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की माँग कर रहे गुर्जर समुदाय के लोगों का उग्र आंदोलन शुक्रवार से फिर शुरू कर दिया है.

शुक्रवार की देर शाम मंत्रिमंडल की बैठक में आंदोलन और उससे उपजी परिस्थितियों पर विचार किया गया और पुलिस फ़ायरिंग की न्यायिक जाँच करवाने की घोषणा की गई है.

राज्य के संसदीय कार्यमंत्री राजेंद्र राठौर ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद पत्रकारों को इसकी सूचना दी.

राज्य सरकार का कहना है कि फ़ायरिंग की स्थिति तब पैदा हुई जब पुलिसबलों पर पथराव और हिंसक हमले शुरू हो गए.

फ़ायरिंग

बयाना में पुलिस ने गुर्जर आंदोलनकारियों को रोकने के लिए फ़ायरिंग भी की जिसके बाद हिंसा भड़क उठी.

इसमें 13 से ज़्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बरें हैं जिसमें एक पुलिस कर्मी शामिल है.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि 20 के क़रीब लोग घायल हुए हैं जिनमें से कुछ की हालत गंभीर है.

राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया ने कहा है कि फ़ायरिंग को अंतिम विकल्प के रुप में इस्तेमाल किया गया.

उन्होंने फ़ायरिंग के बाद पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पुलिस ने पहले लाठीचार्ज किया, अश्रुगैस का प्रयोग किया और रबर बुलेट चलाए लेकिन बिखरी हुई आक्रामक भीड़ को क़ाबू में नहीं किया जा सका.

उन्होंने कहा कि जिस तरह आंदोलनकारियों ने पुलिस के एक सिपाही को मारा उसे रोकना ज़रुरी था. उनका कहना था कि रेलवे ट्रैक को भी बचाना ज़रुरी था.

राज्य के गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने बताया कि अगर स्थितियों को नियंत्रित करने के लिए सेना की ज़रूरत पड़ी तो उनकी भी मदद ली जाएगी.

फिलहाल बड़ी तादाद में अर्धसैनिक बलों और पुलिस की तैनाती आंदोलन से प्रभावित इलाकों में कर दी गई है.

प्रदर्शन

राज्य के बयाना इलाके में शुक्रवार की सुबह से ही अपनी माँगों को लेकर गुर्जर प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और साथ ही रेल यातायात भी बंद कर दिया.

 हिंसा रोकने के लिए पुलिस को मजबूरन गोली चलानी पड़ी. अगर स्थितियों को नियंत्रित नहीं किया जा सका तो सेना की तैनाती की जाएगी
गुलाब चंद कटारिया, गृहमंत्री, राजस्थान सरकार

क़रीब तीन हज़ार की तादाद में गुर्जर दिल्ली से मुंबई को जोड़ने वाले मुख्य रेलमार्ग पर धरना देकर बैठ गए थे.

इसके बाद से रेल अधिकारियों ने इस रूट से रेल यातायात रोक दिया. ग़ौरतलब है कि क़रीब 30 प्रमुख रेलगाड़ियों इस रेलमार्ग से गुज़रती हैं.

रेल अधिकारी अब यह तय करने की कोशिश कर रहे हैं कि मुंबई की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए कौन सा रास्ता निर्धारित किया जाए ताकि बिना किसी हिंसा और नुकसान के लोगों को यात्रा का मौका मिल सके.

शुक्रवार के आंदोलन के मद्देनज़र दौसा, करोली, सवाई माधोपुर और भरतपुर ज़िलों में पहले ही निषेधाज्ञा लागू कर दी गई थी.

इन ज़िलों में हिंसा रोकने के लिए 10 से ज़्यादा सुरक्षाबलों की कंपनियाँ तैनात की गई हैं.

आरक्षण की माँग

राजस्थान में गुर्जर समुदाय की अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किए जाने की माँग साल से उग्र हुई है.

राज्य सरकार और केंद्र के समक्ष इस माँग को लेकर गुर्जरों ने पिछले एक वर्ष के दौरान काफ़ी उग्र प्रदर्शन किया जिस दौरान कई लोगों की जानें भी गईं.

गुर्जरों के इस आंदोलन को लेकर पिछले दिनों में राजनीति भी होती रही है. साथ ही अन्य राज्यों के गुर्जर समुदाय के लोगों ने भी राजस्थान के गुर्जरों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया था.

इस आंदोलन का असर दिल्ली, यूपी और हरियाणा में भी देखने को मिला था. राजस्थान के गुर्जरों का तर्क है कि अन्य राज्यों की तरह राजस्थान में भी उन्हें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए.

राज्य सरकार के लिए राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस आंदोलन के फिर से उग्र होना गले में हड्डी साबित हो सकता है.

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