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राजस्थान में गूजर-पुलिस संघर्ष | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
राजस्थान में आरक्षण की माँग कर रहे गूजर समुदाय के लोगों और पुलिस के बीच हुए संघर्ष में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई है. इस दौरान कई लोग घायल हो गए हैं. मारे गए लोगों में 12 आम नागरिक हैं और दो पुलिसकर्मी हैं. लोगों की मौत पुलिस की ओर से की गई फ़ायरिंग के कारण हुई. हालांकि गूजर जाति के लोग पहले से ही अन्य पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में आते हैं पर उनकी माँग है कि उन्हें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किया जाए. राज्यभर में स्थिति गंभीर हो गई है और नियंत्रण के लिए सेना की मदद ली जा रही है. पहली घटना दौसा-करोली सीमा पर हुई. वहीं राज्य के बूंदी ज़िले में भी लोगों के मारे जाने की ख़बर है. गूजर समुदाय के लोगों का प्रदर्शन राज्य के आठ ज़िलों में देखने को मिल रहा है. ये सभी ज़िले राज्य के दक्षिण-पूर्व और पूर्वी हिस्से में स्थित हैं. उग्र विरोध-प्रदर्शन देख रहे ज़िलों में बूंदी, करोली, दौसा, भरतपुर, अजमेर और जयपुऱ शामिल हैं. स्थिति गंभीर प्राप्त जानकारी के मुताबिक दौसा में गूजर समुदाय के लोग भारी तादाद में अभी भी इकट्ठा हैं. ये लोग मृतकों के शव लेकर बैठे हैं और इनकी माँग है कि तबतक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा जबतक राज्य के वरिष्ठ अधिकारी उनकी माँगों को मानने के लिए कोई ठोस आश्वासन नहीं दे देते. उधर गूजर समुदाय के एक नेता अवतार सिंह बढाना भी दौसा पहुँच गए हैं. उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम के लिए राज्य सरकार को दोषी ठहराया है. घटना के बाद गृहमंत्री आला अधिकारियों के साथ एक आपात बैठक कर रहे हैं जिसमें मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी शामिल हुई हैं. कटारिया का कहना था कि इलाक़े में हुई हिंसा के बाद तनाव को देखते हुए पुलिस को हटा लिया गया है. कटारिया ने स्वीकार किया कि हालात तनावपूर्ण है और स्वीकार किया कि भीड़ अभी भी हिंसा वाले इलाक़े में पहुंच रही है. उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वो बातचीत का रास्ता अख्तियार करें. हिंसा
हिंसा की घटना उस समय हुई जब जयपुर आगरा राजमार्ग के पास दौसा ज़िले में प्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोका और पुलिस से उनकी झड़प हुई. गूजर समुदाय के लोग अनुसूचित जनजाति के तौर पर आरक्षण दिए जाने की मांग कर रहे है. राजस्थान में गूजर समुदाय काफी प्रभावशाली माना जाता है और आंदोलन के और तेज़ होने के आसार व्यक्त किए जाते रहे हैं. समुदाय ने आज आठ ज़िलों में बंद का आह्वान किया था और इसे देखते हुए पुलिस ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर रखे हैं. विभिन्न राजमार्गों के एक किलोमीटर की परिधि में निषेधाज्ञा लगा दी गई है और अनेक लोगों को एहतियात के तौर पर हिरासत में लिया गया है. उधर अनुसूचित जनजाति में शामिल जातियां गूजरों को आदिवासी का दर्ज़ा दिए जाने का विरोध कर रही हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बाढ़ से बदलती रेगिस्तान की तस्वीर05 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस एक मुलाक़ात: वसुंधरा राजे के साथ22 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस शिल्पकारों की नज़र सियायत पर08 मई, 2007 | भारत और पड़ोस राजस्थान में 28 डॉक्टरों पर पाबंदी16 मई, 2007 | भारत और पड़ोस कन्या भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ अभियान22 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'देवी वसुंधरा' के कैलेंडर की शिकायत26 मई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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