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मंगलवार, 22 मई, 2007 को 22:55 GMT तक के समाचार
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कन्या भ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ अभियान

कन्या भ्रूण अभियान
कन्या भ्रूण हत्या की वजह से ही भारत में महिला-पुरुष अनुपात गिरता जा रहा है
राजस्थान में लड़कियों की घटती संख्या से चिंतित जैन समाज की महिलाओं ने कन्या भ्रूण हत्या के विरुद्ध अभियान छेड़ दिया है.

इस काम में साधु-संतों और समाज के दूसरे लोगों की भी मदद ली जा रही है.

पंडितों ने आश्वासन दिया है कि वे केवल बेटों को महिमामंडित करने वाले श्लोकों में बदलाव के लिए तैयार हैं और शायद अब पुत्रवान भव की जगह संतान भव के श्लोक सुनाई दें.

तेरापंथ महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष सायर बेंगानी ने बीबीसी को बताया कि उनके यहाँ लड़कियों की संख्या तेज़ी से कम हो रही है.

जागृति अभियान

राजस्थान में फिलहाल एक हज़ार पुरुषों पर 870 महिलाएँ हैं. महिला मंडल ने जगह-जगह सम्मेलन कर जागृति अभियान छेड़ दिया है.

इस अभियान को आचार्य महाप्रज्ञ, युवाचार्य महाश्रमण और साध्वी कनक प्रभा का सक्रिय सहयोग मिल रहा है.

 हम समाज के वरिष्ठ लोगों से बात कर उन श्लोकों में बदलाव करेंगे जो पुत्रों का महिमामंडन करते हैं. पुत्रवान भव की जगह हम संतान भव का श्लोक काम में ले सकते हैं
अर्जुन पंडित

इस अभियान में सिख समाज, राजपूत और मुस्लिम महिला संगठनों ने सुर मिलाया है.

श्रीगंगानगर में एक गुरुद्वारे के मुख्य सेवादार तेजेंदर पाल सिंह टिम्मा कहते हैं, “हम गाँव-गाँव जाकर बेटियों के हक़ में अलख जगा रहे हैं. हमारे ग्रंथ कहते हैं कि कुड़ी मार से कोई दोस्ती नहीं. यानी कन्या भ्रूण हत्या करने वाले से कोई रिश्ता नहीं.”

टिम्मा का कहना है कि ग्रंथों का हवाला देकर लोगों को भ्रूण हत्या नहीं करने लिए पाबंद किया जा रहा है.

कन्या गरिमा कार्यक्रम

डिग्निटी टू गर्ल चाइल्ड प्रोग्राम यानी कन्या गरिमा कार्यक्रम की राज्य समन्वयक डॉ मीना सिंह कहती हैं, “ भ्रूण हत्या रोकने के लिए हमें भ्रूण परीक्षण तकनीकी से जुड़े लोगों और डॉक्टरों से संपर्क करना होगा.”

 भ्रूण हत्या रोकने के लिए हमें भ्रूण परीक्षण तकनीकी से जुड़े लोगों और डॉक्टरों से संपर्क करना होगा
डॉ मीना सिंह, समन्वयक, कन्या गरिमा कार्यक्रम

सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में 1200 से ज़्यादा अल्ट्रासाउंड मशीनें लगी हैं.

इस मुहिम को पंडितों ने भी समर्थन दिया है. ब्राह्मण समाज के अर्जुन पंडित कहते हैं, “हम समाज के वरिष्ठ लोगों से बात कर उन श्लोकों में बदलाव करेंगे जो पुत्रों का महिमामंडन करते हैं. पुत्रवान भव की जगह हम संतान भव का श्लोक काम में ले सकते हैं.”

राजपूत समाज की प्रेम कंवर की मानें तो इस मुद्दे पर राजपूतों में सकारात्मक परिवर्तन आया है. वो कहती हैं, “अतीत की बात भूल जाओ. अब बेटियों की संख्या बढ़ रही है.”

मुस्लिम वेलफ़ेयर सोसायटी की निशात हुसैन कहती हैं, “कम से कम मुसलमानों में तो बेटी को कोख में मारने की बुराई नहीं है. मजहब शायद इसका बड़ा कारण है. नबी ने कहा है कि जिसके दो बेटियाँ हैं वो जन्नत का हक़दार है.”

तेरा पंथ महिला मंडल की कांता जैन और बीना कहती हैं, “हम लोगों में बेटियों के प्रति प्रेम की समझ पैदा कर रहे हैं.”

इसी मुहिम से जुड़ी कांता मालू का कहना है कि जैन तीर्थंकरों ने अहिंसा का पैगाम दिया था और कन्या भ्रूण का वध अहिंसा के संदेश का उल्लंघन है.

राजस्थान सरकार ने हाल ही में कन्या भ्रूण हत्या के आरोप में 28 डॉक्टरों की प्रेक्टिस पर रोक लगा दी थी. लेकिन वंश, वसीयत और विरासत के नाम पर बेटियों को उपेक्षित रखने की प्रवृत्ति अब भी कायम है.

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