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बुधवार, 14 जून, 2006 को 10:45 GMT तक के समाचार
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कन्या भ्रूणहत्या: सात डॉक्टर निलंबित

भ्रूण
भ्रूण परीक्षण और लिंग के आधार पर गर्भपात करवाना भारत में ग़ैरक़ानूनी है
राजस्थान में अधिकारियों का कहना है कि कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में शामिल होने के आरोप में सरकार ने सात सरकारी डॉक्टरों को निलंबित कर दिया है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर दिगंबर सिंह ने कहा है कि तीन जूनियर डॉक्टरों को भी निलंबित करने की सिफ़ारिश की गई है.

सरकार ने ये कार्रवाई एक टेलीविज़न चैनल की रिपोर्ट प्रसारित होने के बाद की है.

चैनल ने ख़ुफ़िया कैमरे से डॉक्टरों को कन्या भ्रूणहत्या में शामिल होने की स्वीकृति देते हुए दिखाया गया था.

इससे पहले राज्य की पुलिस ने इस तरह के मामलों में शामिल होने के आरोप में 21 डॉक्टरों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था.

परिवार कल्याण विभाग के निदेशक एसपी यादव ने कहा, "हमें 37 डॉक्टरों के ख़िलाफ़ शिकायतें मिली थीं और हम मामले की जाँच कर रहे हैं."

उनका कहना है कि अधिकारियों से उन सभी अस्पतालों और प्रयोगशाला की जाँच करने को कहा गया है जिनको कथित रूप से इस मामले में लिप्त माना जा रहा था और जिनमें अल्ट्रासाउंड मशीनें लगी हुई हैं.

डॉक्टरों ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि उन्हें इस मामले में फँसाया गया है.

उल्लेखनीय है कि कन्या भ्रूण का परीक्षण भारत में क़ानूनन जुर्म है.

राजस्थान उन राज्यों में से एक है जहाँ कन्या भ्रूण हत्या बहुत अधिक संख्या में होती है.

जनगणना के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक राजस्थान में प्रति 1000 पुरुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या 922 है.

लेकिन धौलपुर, जैसलमेर और सवाईमाधोपुर जैसे कुछ ज़िलों में ये संख्या 820 तक नीचे चली गई है.

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