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बुधवार, 29 मार्च, 2006 को 02:32 GMT तक के समाचार
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भ्रूण हत्या मामले में पहली बार जेल
लड़कियाँ
भारत में पिछले कुछ दशकों से लड़कियों की संख्या लगातार घट रही है
क़ानून बनने के 12 वर्षो और लाखों कन्या भ्रूणों की हत्या के बाद पहली बार कन्या भ्रूण हत्या के मामले में जेल की सज़ा सुनाई गई है.

हरियाणा की एक स्थानीय अदालत में एक डॉक्टर और उसके सहायक को मंगलवार को भ्रूण परीक्षण और कन्या भ्रूण की हत्या के लिए हामी भरने के आरोप में दो साल जेल और पाँच हज़ार ज़ुर्माने की सज़ा सुनाई गई.

इससे पहले इस क़ानून के तहत आर्थिक दंड तो दिए जा चुके हैं लेकिन जेल की सज़ा पहली बार हुई है.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ विनय अग्रवाल ने बीबीसी से हुई बातचीत में इसे ऐतिहासिक निर्णय बताया है.

उल्लेखनीय है कि कन्या भ्रूण की हत्या को लेकर भारत में लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है और इसे रोकने के लिए क़ानून बनाने के अलावा लड़कियों के लिए कई योजनाएँ सरकार ने बनाई हैं.

लेकिन इसके बावजूद हर बार जनगणना से ज़ाहिर होता रहा है कि देश में लड़कों की तुलना में लड़कियाँ कम पैदा हो रही हैं और इसका कारण यही होता है कि कन्या भ्रूण की हत्या कर दी जाती है.

वर्ष 2001 में हुई जनगणना के अनुसार भारत में एक हज़ार पुरुषों के पीछे औसतन 927 महिलाएँ ही हैं. ये अनुपात 1991 की जनगणना में 945 था.

हरियाणा राज्य तो इस मामले में सबसे बुरी स्थिति में है और वहाँ प्रति हज़ार पुरुषों के पीछे लगभग 860 महिलाएँ ही हैं.

मामला

जिस मामले में सज़ा सुनाई गई है वह हरियाणा के पलवल का है.

भ्रूण हत्या के लिए बने क़ानून के तहत बनी ज़िले की निगरानी समिति ने वर्ष 2001 में डॉ अनिल सभानी और उनके सहायक कर्तार सिंह के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था.

लिंग परीक्षण और फिर भ्रूण हत्या की शिकायतों के बाद इस समिति ने एक जाल बुना और जब डॉक्टर ने आश्वासन दिया कि वे 'कन्या भ्रूण होने पर मामले को देख लेंगे' इसकी ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली गई.

हालांकि अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी गवाह मुकर गए लेकिन अदालत ने ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग को पर्याप्त सबूत मानते हुए मंगलवार को सज़ा सुनाई.

डॉक्टर और उसके सहायक को लिंग परीक्षण के लिए पाँच हज़ार का ज़ुर्माना भी लगाया गया है.

इस क़ानून के तहत चार हज़ार से भी अधिक मामले दर्ज हैं और इससे पहले कुछ मामलों में आर्थिक दंड की सज़ा तो सुनाई जा चुकी है लेकिन जेल भेजे जाने का यह पहला मामला है.

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