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बुधवार, 30 मई, 2007 को 03:58 GMT तक के समाचार
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राजस्थान: मंत्रियों की समिति गठित

राजस्थान
यह आंदोलन अब संगठित रुप लेता दिखाई दे रहा है
राजस्थान में गूजर समुदाय की आरक्षण की मांग पर बातचीत के लिए राज्य सरकार ने चार मंत्रियों की एक समिति बनाई है जबकि उधर दौसा में फिर भड़की हिंसा में प्रदर्शनकारियों ने दो पुलिस थानों में आग लगा दी.

सरकार का कहना है कि यह समित गूजरों के नेताओं से बात करेगी जबकि गूजर नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बेंसला ने कहा है कि बिना ठोस आधार के गूजर अपना आंदोलन वापस नहीं लेंगे.

जयपुर से 115 किलोमीटर दूर दौसा ज़िले के पाटोली गांव में अभी भी हज़ारों की संख्या में गूजर बैठे हैं और आज पुलिस फायरिंग के बाद भीड़ ने दो थानों को जला दिया.

पहले से ही अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल गूजर समुदाय की माँग है कि उन्हें अनुसूचिज जनजाति का दर्जा दिया जाए.

विधायकों का इस्तीफ़ा

गूजरों के विरोध ने अब राजनीतिक रंग लेना भी शुरु कर दिया है.

राज्य में सरकार चला रही भारतीय जनता पार्टी के पांच गूजर विधायकों ने पार्टी नेतृत्व से इस्तीफ़ा देने की अनुमति मांगी है.

इनमें ग्रामीण विकास मंत्री कालूलाल गूजर भी शामिल है.

उन्होंने कहा कि मंगलवार की घटना से वो व्यथित हैं इसलिए चाहते हैं कि पार्टी उन्हें इस्तीफ़ा देने की अनुमति दे दे.

सकते में आई बीजेपी और सरकार विधायकों को मनाने का प्रयास कर रही है.

इसी माँग को लेकर पुलिस और गूजर समुदाय के बीच मंगलवार को हुए संघर्ष में कम से कम 14 लोगों की मौत हो गई थी और अनेक लोग घायल हुए थे.

इस घटना के बाद से ही दौसा में सैनिक टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं और बुधवार को सेना ने इलाक़े में फ्लैग मार्च भी किया है.

मारे गए लोगों में 12 आम नागरिक हैं और दो पुलिसकर्मी हैं. लोगों की मौत पुलिस फ़ायरिंग से हुई.

हिंसा

बुधवार सुबह दौसा के दूबी और सिकंदरा पुलिस थानों पर प्रदर्शनकारियों ने धावा बोल दिया और आग लगा दी.

मंगलवार को पुलिस के साथ संघर्ष में दो पुलिसवालों समेत 14 लोग मारे गए

जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर अभी भी यातायात ठप्प है क्योंकि कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर दिया है.

इस बीच, कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी के नेतृत्व में दौसा जा रहे पाँच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है.

बूंदी के पाटोली और पीपलखेड़ा में भारी संख्या में लोग पुलिस फ़ायरिंग में मारे गए छह लोगों के शवों के साथ सड़क पर धरना दे रहे हैं.

उनका कहना है कि जब तक सरकार सीधे उनसे बात नहीं करती तब तक मारे गए लोगों का दाह संस्कार नहीं किया जाएगा.

गूजर संगठनों ने बुधवार को भीलवाड़ा ज़िले में बंद का आह्वान किया है.

तनाव

उत्तर प्रदेश से सटे भरतपुर में ख़ुद पुलिसकर्मी एहतिआती तौर पर वाहनों को रोक रहे हैं और उन्हें आगे नहीं जाने की सलाह दे रहे हैं.

भड़ाना ने राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग की है

इसके लिए कई जगहों पर पेड़ गिराकर सड़क मार्ग अवरूद्ध किया गया है.

इस बीच मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की अध्यक्षता में मंगलवार रात राज्य कैबिनेट की आपात बैठक हुई.

बैठक के बाद सरकार ने जो कुछ कहा उसमें सांत्वना कम तल्ख़ी ज़्यादा झलक रही थी. राज्य सरकार का कहना है कि जो लोग शांति भंग करने की कोशिश करेंगे उन्हें बख़्शा नहीं जाएगा.

इस घटना के बाद राज्य में कई स्थानों पर स्थिति गंभीर हो गई है और इसके मद्देनज़र सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की जा रही है.

सरकार निशाने पर

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को इस मामले पर अपनी ही पार्टी (भारतीय जनता पार्टी) के कुछ नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है.

 वसुंधरा सरकार ने आश्वस्त किया था कि गूजरों को आरक्षण दिया जाएगा. अब राज्य सरकार को आरक्षण की सिफ़ारिश करने में क्या दिक्कत है
गूजर नेता अवतार सिंह भड़ाना

गूजर महासभा के अध्यक्ष और भाजपा नेता रामगोपाल ने पूरी घटना के लिए राज्य सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए एक मंत्री से इस्तीफ़े की माँग की है.

गूजर समुदाय के एक अन्य नेता और कांग्रेस सांसद अवतार सिंह भड़ाना ने आशंका व्यक्त की है कि अगर राज्य सरकार ने लोगों की माँगों पर ध्यान नहीं दिया तो स्थिति विस्फोटक हो सकती है.

उन्होंने केंद्र सरकार से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की भी माँग की है.

भड़ाना का कहना है, "वसुंधरा सरकार ने आश्वस्त किया था कि गूजरों को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया जाएगा. अब राज्य सरकार को इस तरह की सिफ़ारिश करने में क्या दिक्कत है."

टकराव की आशंका

गूजर बहुल इलाक़ों में आरक्षण का मामला अब संगठित आंदोलन का स्वरूप अख़्तियार कर रहा है.

सरकार और आंदोलनकारियों की भाषा में कोई ख़ास फ़र्क नहीं दिखाई दे रहा है और दोनों अपने अपने रूख़ पर कायम हैं.

इस बीच अनुसूचित जनजाति में शामिल मीणा समुदाय की भी अगले कुछ दिनों में बैठक होने वाली है और वे भी संगठित हो रहे हैं.

ऐसे में जातीय टकराव की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है.

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