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हाथी ने सात लोगों को कुचलकर मारा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हरिद्वार के पास लक्सर इलाक़े में एक जंगली नर हाथी ने सात लोगों को कुचलकर मार डाला और 15 से अधिक लोगों को घायल कर दिया. ग़ुस्से और उन्माद से भरे हाथी ने फ़सल को भी नुक़सान पहुँचाया है. वन विभाग के अधिकारियों ने पुलिस की मदद से इस हाथी को मार दिया है. उत्तराखंड का राजाजी नेशनल पार्क एशियाई हाथियों का सबसे बड़ा वास है. ये हाथी इसी नेशनल पार्क के जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाक़े में घुस आया था. हरिद्वार से नैनीताल या ऋषिकेश से पौड़ी के रास्ते में सैलानियों का अक्सर राजाजी पार्क के हाथियों से सामना होता है. कभी हाथियों के झुंड सड़क पार करते हुए मिल जाते हैं तो कभी अपनी माँ से बिछुड़ा हुआ हाथी का कोई नन्हा बच्चा पेड़ों के बीच भटकता दिख जाता है तो कभी कोई नर (टस्कर) हाथी शान से चलता मिल जाता है. इसकी वजह से कभी–कभी सड़क के दोनों ओर लंबा जाम भी लग जाता है. मौत का तांडव लेकिन ये हाथी मौत का तांडव भी रच सकते हैं ये देखने को मिला लक्सर के बुड़ाखेड़ी और आसपास के क़रीब पाँच गाँवों में.
एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, पहले तो ये हाथी खेतों में घुस गया और खड़ी फसलों को कुचलता रहा और फिर एक-एक करके लोगों को सूंड में दबाकर पैरों से कुचलता चला गया. इससे लोगों में भारी अफ़रा-तफ़री मच गई और लोगों का गुस्सा वन विभाग पर फूट पड़ा. हालत देखकर वन अधिकारियों ने इसे मारने के आदेश दे दिए. मौक़े पर गए उत्तराखंड के मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक श्रीकांत चंदोला ने बीबीसी को बताया कि ये हाथी भारी ग़ुस्से और उन्माद में भरा था और इससे लोगों को जान का ख़तरा हो गया था. उनका कहना था कि वन्य जीव क़ानून के तहत इसे मार डालना ही अंतिम रास्ता था. करीब सात घंटों की मशक्कत के बाद पुलिस अधिकारियों और वन अधिकारियों की संयुक्त टीम इसे मारने में कामयाब हो पाई. स्थानीय पत्रकार शिवा अग्रवाल ने बताया कि हाथी इतना बेकाबू था कि उसपर बेहोशी की गोलियों का कोई असर नहीं हुआ और अंत में भी जब उसे गोली मारी गई उसके बाद भी वो उठ खड़ा हुआ और लड़खड़ाता हुआ पास में गंगा की नहर में जा गिरा. करीब 820 वर्ग मीटर में फैले राजाजी नेशनल पार्क की परिधि में कई गांव बसे हुए हैं जहां हाथी अक्सर उत्पात मचाते हैं लेकिन ये पहला मौक़ा है कि एक हाथी ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों को मार डाला है. वन्य जीव विशेषज्ञ आनंद सिंह नेगी के अनुसार, "इंसान और हाथी के बीच टकराव की ये समस्या बढ़ती आबादी, कटते जंगल और पानी के स्रोतों में कमी की वजह से पैदा हुई है जिससे भोजन और पानी की तलाश में हाथी आबादी की ओर रुख़ करने के लिये मजबूर हैं." |
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