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बुधवार, 08 जून, 2005 को 01:29 GMT तक के समाचार
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हाथी भगाने के लिए मिर्ची बम
हाथी
असम में पिछले 15 वर्षों में हाथियों ने 600 से अधिक लोगों की जान ली है
पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम में चरमपंथी हिंसा और बाढ़ के बाद अगर और किसी बड़ी समस्या की बात आती है तो वो है हाथियों का संकट.

अक्सर वहाँ हाथी आते हैं और उत्पात मचाकर चले जाते हैं.

एक अनुमान है कि पिछले 15 वर्षों में हाथियों ने वहाँ 600 से अधिक लोगों की जान ले ली है.

अब ऐसे उत्पाती हाथियों को भगाने के लिए मिर्ची बम के प्रयोग पर विचार चल रहा है.

साथ ही हाथियों के ख़तरों वाले क्षेत्रों में ऐसे तार लगाने की भी कोशिश हो रही है जिनसे हाथियों के आने की चेतावनी मिल सकेगी.

प्रयोग

 अगर ये योजना सफल रही तो गाँववालों को भय के कारण रात-रात भर जागकर नहीं रहना पड़ेगा
नंदिता हज़ारिका, हाथी परियोजना

असम में हाथी परियोजना की समन्वयक नंदिता हज़ारिका के अनुसार हाथियों को भगाने की नई तरकीब प्रयोग के तौर पर असम के पाँच गाँवों में अपनाई गई.

उन्होंने बताया कि इन गाँवों में घरों से कुछ सौ मीटर की दूरी पर तार बिठाए जाएँगे.

ये एक बैटरी से चलनेवाली व्यवस्था होगी और जैसे ही हाथी इस तार से सटेंगे, मिर्ची बम फट पड़ेगा.

नंदिता हज़ारिका ने बताया कि असम में मिर्चियों की कुछ ऐसी किस्में पाई गई हैं जिनकी गंध हाथी बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं.

उनके अनुसार ऐसे में इस बम से निकलनेवाली गंध से हाथी भाग सकते हैं.

उन्होंने कहा,"अगर ये योजना सफल रही तो गाँववालों को भय के कारण रात-रात भर जागकर नहीं रहना पड़ेगा".

ये परियोजना असम में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करनेवाली एक संस्था और ब्रिटेन के चेस्टर चिड़ियाघर के साझा प्रयास से चलाई जा रही है.

समस्या

 असम में पिछले 20 वर्षों में बड़े पैमाने पर जंगलों के क्षेत्र में कमी आने के कारण हाथियों का अपना ख़ास गलियारा छिन्न-भिन्न हुआ है
प्रद्युत बोरदोलोई

पूर्वोत्तर भारत में जंगली हाथी अच्छी-ख़ासी संख्या में पाए जाते हैं और अकेले असम में इनकी संख्या 5000 से अधिक बताई जाती है.

लेकिन जैसे-जैसे असम में लोगों की आबादी बढ़ती गई, लोगों ने ऐसे इलाक़ों में पाँव पसारने शुरू कर दिए जो हाथियों के आने-जाने की जगह थी.

असम के वन मंत्री प्रद्युत बोरदोलोई का कहना है,"असम में पिछले 20 वर्षों में बड़े पैमाने पर जंगलों के क्षेत्र में कमी आने के कारण हाथियों का अपना ख़ास गलियारा छिन्न-भिन्न हुआ है".

सैटेलाइट से मिली तस्वीरें ये बताती हैं कि असम में 1996 से 2000 के बीच जंगल की लगभग तीन लाख हेक्टेयर ज़मीन ग्रामीणों ने हथिया ली.

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