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अब हाथियों के लिए 'परिवार नियोजन' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पश्चिम बंगाल सरकार का कहना है वहाँ हथियों की प्रजनन दर रोकने के लिए कार्यक्रम चलाना पड़ेगा क्योंकि उसके पास हाथियों के रखरखाव के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है. गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में तकरीबन 400 हाथी हैं. इनमें से 70 ऐसे हैं जिनकी देखभाल वन विभाग और व्यक्तिगत मालिक करते हैं. इन हथियों का इस्तेमाल वन सुरक्षाकर्मी अभ्यारण में गश्त लगाने के लिए करते हैं. इसीलिए राज्य का वन विभाग हर साल छह करोड़ रुपए हथियों के रखरखाव पर खर्च करता है. वन विभाग के अधिकारी पीटी भाटिया का कहना है, "हमारा विभाग वित्तीय समस्या से जूझ रहा है और हमें बजट में कटौती करनी पड़ी है. इसलिए हमें कहा गया है कि हम उन्हीं हाथियों की देखरेख करें जो गश्त के काम आ सकें." उनका कहना है कि इसके साथ ही उन्हें सलाह दी गई है कि हाथियों की संख्या बढ़ने से रोकने के लिए 'परिवार नियोजन' कार्यक्रम चलाया जाए. वन विभाग के लिए काम कर रहे हाथी हर साल तीन से चार बच्चों को जन्म देते हैं. सिर्फ़ तीस हाथियों का उपयोग राज्य के पशु अभ्यारण की गश्त लगाने के लिए किया जाता है. स्वयंसेवी संगठन नाराज़ भाटिया का कहना है, "हमारे पशु रोग विशेषज्ञ हथिनों में प्रजनन दर कम करने के लिए इंजेक्शन और गोलियां की व्यवस्था कर रहे हैं." लेकिन स्वयंसेवी संगठन सरकार के इस निर्णय से बेहद ख़फ़ा हैं. 'फ़्रैंड्स ऑफ़ वैटलेंड एंड वाइल्ड लाइफ़' जैसे पर्यावरण समूह की संयोजक मुक्ता मुखर्जी कहती हैं, "ये एक ख़ूनी तरीका है. अगर सरकार हाथियों की देखभाल नहीं कर सकती तो उन्हें लोग जुटाने चाहिए. लेकिन ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे इनकी संख्या न बढ़े." उनका कहना है, "हाथियों की प्रजनन दर रोकने से अच्छा है वन विभाग जवान हाथियों को जंगल में छोड़ दे. इस तरह वे अपना भोजन ख़ुद जुटा लेंगे. इसके अलावा पैसा जुटाने के और भी प्रयास किए जा सकते हैं." दस साल पहले भारत करीब 50 हज़ार हाथियों का घर था. लेकिन शिकार और देखभाल में कमी के कारण इनकी संख्या लगातार कम होती जा रही है. हर साल बड़ी तादाद में हाथी दाँत की तस्करी होती है और कई हाथियों को मार दिया जाता है. | इससे जुड़ी ख़बरें हाथियों के संरक्षण पर एशियाई सम्मेलन28 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना हाथियों से परेशान है छत्तीसगढ़20 नवंबर, 2005 | भारत और पड़ोस जंगली हाथियों पर नियंत्रण की कोशिश02 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस हाथी भगाने के लिए मिर्ची बम08 जून, 2005 | भारत और पड़ोस हाथियों के उत्पात को रोकने के लिए करंट28 अप्रैल, 2005 | भारत और पड़ोस हाथियों के लिए भारत की अपील16 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस शराबी हाथियों की जानें गईं20 जनवरी, 2004 | भारत और पड़ोस हाथियों को पेंशन | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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