|
हाथियों के संरक्षण पर एशियाई सम्मेलन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मलेशिया में एशियाई हाथी की आबादी वाले 13 देशों ने एक बैठक में हाथियों के संरक्षण के तरीक़ों पर विचार विमर्श किया है. ये इस तरह की पहली बैठक थी. कुआलालंपुर में हुई इस तीन दिवसीय बैठक में प्रतिनिधियों ने हाथियों के घटती संख्या पर रोक लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों की ज़रूरत बताई. विश्व संरक्षण संघ के अधिकारी डॉ. होली डब्लिन ने बैठक में हुई चर्चा पर संतोष जताया लेकिन कहा कि बैठक हाथियों के संरक्षण की दिशा में पहला क़दम मात्र है. उन्होंने कहा, "अभी किसी समझौते की अपेक्षा करना जल्दबाज़ी होगी. इन 13 देशों को साथ लाने में ही काफ़ी समय लग गया है." पूरे आँकड़े उपलब्ध नहीं डॉ. डब्लिन के अनुसार हाथियों की आबादी के बारे में पुख़्ता आँकड़े उपलब्ध नहीं है, और बैठक में उपस्थित प्रतिनिधियों ने इस बारे में सहयोग की ज़रूरत बताई. उल्लेखनीय है कि अभी तक हाथियों की वास्तविक आबादी के बारे में मात्र अनुमान ही लगाए जाते हैं. इन अनुमानों के अनुसार जहाँ वियतनाम में 100 से भी कम हाथी रह गए हैं, वहीं भारत में 20 हज़ार से ज़्यादा हाथी हैं. डॉ. डब्लिन के अनुसार हाथियों की आबादी के वितरण और उनके स्थानांतरण के बारे में पुख़्ता जानकारी होने पर हाथियों के संरक्षण में मदद मिलेगी. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||