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बुधवार, 26 दिसंबर, 2007 को 14:32 GMT तक के समाचार
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'ओसामा' से बचने के लिए बाघ...

हाथी
झारखंड में हाथियों की संख्या घट रही है - तस्वीरें - महादेव सेन
भारत के झारखंड राज्य में वन अधिकारियों ने ओसामा बिन लादेन (हाथी) नामक एक हिंसक हाथी और उसके झुंड के आतंक से बचने लिए नायाब तरीका ढूँढ़ निकाला है.

अधिकारियों ने गाँव के लोगों से बाघ के मल-मूत्र को इकट्ठा करने की सलाह दी है जिससे हाथियों को भगाया जा सके.

उल्लेखनीय है कि अल क़ायदा के नेता ओसामा बिन लादेन के हमनाम इस हाथी और उसके झुंड ने पिछले तीन महीनों में झारखंड में सात लोगों को रौंद कर मार डाला.

वन अधिकारियों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में बाघ का आना-जाना होता है वहाँ हाथी नहीं जाते.

ज़िला वन अधिकारी पारितोष उपाध्याय ने बीबीसी को बताया, "जिन क्षेत्रों में बाघ रहते है उन क्षेत्रों में हाथी नहीं जाते. वे दूर से ही बाघ की मौजूदगी सूँघ लेते हैं."

झारखंड के वन अधिकारियों का कहना है कि वे राज्य के चिड़ियाघरों से बाघ के मल-मूत्र को इकट्ठा कर गाँव के उन इलाक़ों में बाँटेंगे जहाँ पर ओसामा बिन लादेन (हाथी) और उसके झुंड का आना-जाना होता है.

वन अधिकारियों ने गाँव वालों को सलाह दी है कि वे घरों में देशी शराब महुआ इकट्ठा नहीं करें. पिछले महीनों में ओसामा बिन लादेन (हाथी) और उसके झुंड ने उन घरों पर हमला किया जहाँ महुआ रखा हुआ था.

 जिन क्षेत्रों में बाघ रहते है उन क्षेत्रों में हाथी नहीं जाते. वे दूर से ही बाघ की मौज़ूदगी सूँघ लेते हैं.
ज़िला वन अधिकारी, पारितोष उपाध्याय

उन्होनें लोगों से शाम के बाद जंगल में जाने से भी मना किया है.

पारितोष उपाध्याय का कहना है, "इस तरह के प्रबंधों से थोड़ा-बहुत असर हुआ है और हताहतों की संख्या में कमी आई है."

घटती संख्या

जहाँ पर हाथियों का आतंक जारी है उन इलाक़ों में रहने वाले आदिवासियों ने जंगल जाकर बाघ के मल-मूत्र को इकट्ठा करना शुरू भी कर दिया है.

झारखंड और पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल की सरकार के कर्मचारी ओसामा और उसके झुंड को पकड़ने के लिए संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं लेकिन अभी तक ओसामा बिन लादेन (हाथी) को पकड़ना संभव नहीं हो सका है.

अधिकारियों के मुताबिक पिछले छह वर्षों में झारखंड राज्य के क़रीब 400 लोगों को हाथियों ने मार डाला और 700 से ज़्यादा लोगों को घायल कर दिया है.

अधिकारियों ने कहा कि इन्हीं वर्षों में 10 हाथियों को अवैध शिकारियों ने मार डाला.

मई 2007 में की गई गणना के मुताबिक झारखंड में हाथियों की संख्या 772 से घट कर 622 रह गई है.

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