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सरबजीत के लिए रहम की अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में मानवाधिकार मामलों के पूर्व मंत्री अंसार बर्नी ने वहाँ क़ैद भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह को बचाने की आख़िरी कोशिशों के तहत राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास याचिका भेजी है. रहम की अपील वाली ये याचिका सोमवार को राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास भेजी गई है. इस याचिका में अंसार बर्नी ने अपील की है कि सरबजीत सिंह की मौत की सज़ा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाए या उन्हें रिहा कर दिया जाए. अभी तक की स्थिति के मुताबिक़ एक मई को सरबजीत सिंह को फाँसी दिया जाना है. सरबजीत सिंह पर जासूसी और 1990 में कई बम धमाके करवाने का आरोप है जिसमें 14 लोग मारे गए थे. उन पर लाहौर की एक अदालत में मुक़दमा चला और 1991 में उनको मौत की सज़ा सुना दी गई. निचली अदालत की ये सज़ा हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी बहाल रखी. कमज़ोर मामला बीबीसी हिंदी के साथ बातचीत में अंसार बर्नी ने कहा कि पहले वो भी मानते थे कि सरबजीत सिंह एक चरमपंथी है जिसने 14 लोगों की हत्या की है और उन्हें इस मामले में दिलचस्पी नहीं थी. अंसार बर्नी का कहना है कि कई लोगों ने जब उनसे अपील की तो उन्होंने मामले की पड़ताल की. बर्नी ने बताया, "मेरे पास कई दिनों से अपील आ रही है. भारत से दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम ने अपील की, अजमेर से भी ख़्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के गद्दीनशीं ने मेरे पास अपील भेजी तो मैंने मामले में दिलचस्पी ली." अंसार बर्नी के मुताबिक़ वे इस मामले में सरबजीत सिंह के वकील से भी मिले. उनका कहना है कि तमाम दस्वातेज़ और मामले के बारे में जानने के बाद वे इस नतीजे पर पहुँचे कि सरबजीत सिंह का मामला काफ़ी कमज़ोर है. अंसार बर्नी ने बताया, "सरबजीत मामले में गवाहों का कहना है कि पुलिस ने ज़बरदस्ती उनसे गवाही ली थी. चार एफ़आईआर में सरबजीत सिंह का नाम कहीं भी नहीं है." दबाव उन्होंने कहा कि मौत की सज़ा के मामले में एक रत्ती भर भी शक रहता है तो इसका फ़ायदा अभियुक्त को मिलता है. पहले सरबजीत सिंह को एक अप्रैल को फाँसी दी जानी थी. लेकिन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने इसे 30 दिनों के लिए टाल दिया था.
यानी अब जो स्थिति है उसके मुताबिक़ सरबजीत सिंह को एक मई को फाँसी दी जानी है. लेकिन इस बीच सरबजीत सिंह की सज़ा माफ़ करने के लिए पाकिस्तान सरकार पर दबाव भी बन रहा है. भारत सरकार ने सरबजीत की सज़ा माफ़ करने की अपील की थी और माना जा रहा है कि पाकिस्तान की नई सरकार सरबजीत मामले की समीक्षा कर सकती है. अंसार बर्नी का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के पास भेजी गई अपील में सरबजीत मामले के कई कमज़ोर पक्षों का विस्तार से ज़िक्र किया है. उन्होंने कहा कि सरबजीत सिंह को रहम दिए जाने के लिए अगर ज़रूरत पड़ी तो वे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से भी मिलेंगे. अंसार बर्नी ने कहा कि सरबजीत सिंह की मौत की सज़ा ख़त्म करने से भारत में पाकिस्तान के प्रति समर्थन बढ़ेगा और दोनों देशों के रिश्ते भी बेहतर हो सकते हैं. |
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