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'सरबजीत की फाँसी की तारीख़ तय' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान से समाचार एजेंसियों ने बताया है कि भारतीय क़ैदी सरबजीत सिंह को अगले महीने एक अप्रैल को फाँसी दे दी जाएगी. समाचार एजेंसी पीटीआई और रायटर्स के हवाले से बताया गया है कि सरबजीत को लाहौर में एक अप्रैल को फाँसी दिया जाना तय हुआ है. रायटर्स के मुताबिक सरबजीत को फाँसी दिए जाने की इस तारीख़ की पुष्टि लाहौर से एक वरिष्ठ जेल अधिकारी ने की है. हालांकि पाकिस्तान के मानवाधिकार मामलों के मंत्री अंसार बर्नी और सरबजीत सिंह के वकील अब्दुल हामिद राना ने इसकी पुष्टि नहीं की है. पाकिस्तान सरकार की ओर से भी इस बारे में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है. ग़ौरतलब है कि भारतीय मूल के सरबजीत सिंह को पाकिस्तान में वर्ष 1990 में हुए बम धमाकों के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था और फिर उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई थी. वर्ष 1991 से पाकिस्तान की जेल में सज़ा काट रहे सरबजीत की मौत की सज़ा माफ़ किए जाने और उसे वापस भारत आने देने के लिए अपील की जाती रही है पर पाकिस्तान सरकार ने क्षमादान की याचिका को ख़ारिज करते हुए सरबजीत की मौत की सज़ा बरकरार रखी है. तारीख पर सवाल सरबजीत की सज़ा की तारीख के बारे में पाकिस्तान के मानवाधिकार मामलों के मंत्री अंसार बर्नी ने कहा है कि उन्हें इस पर आश्चर्य है कि रविवार के दिन मौत का वारंट कैसे भेजा गया. उन्होंने कहा कि सोमवार को ही वो इस बारे में पक्के तौर पर कुछ भी बताने की स्थिति में होंगे. बीबीसी के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि मानवाधिकार मामलों का मंत्री होने के नाते वो राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से अपील करेंगे कि सरबजीत सिंह को फाँसी न दी जाए. दूसरी ओर सरबजीत सिंह के वकील अब्दुल हामिद राना ने भी ऐसी किसी भी जानकारी से इनकार किया कि सरबजीत सिंह को फाँसी दिए जाने की तारीख़ तय हो गई है. बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें भी अख़बार की रिपोर्ट पढ़ने के बाद इसका पता चला. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि सरबजीत सिंह का आवेदन ख़ारिज हो जाने के बाद उन्हें तो कभी भी सज़ा दी जा सकती है. दावा रविवार को पाकिस्तान के एक अख़बार डेली एक्सप्रेस ने दावा किया था कि सरबजीत सिंह की मौत का वारंट कोट लखपत जेल भेज दिया गया है और एक अप्रैल को सरबजीत सिंह को फाँसी दे दी जाएगी. इस ख़बर की कुछ अन्य समाचार एजेंसियों की ओर से भी पुष्टि की जा रही है जिसके मुताबिक सरबजीत को फाँसी पर लटकाने की तारीख तय हो चुकी है. पिछले दिनों पाकिस्तान सरकार ने एक अन्य भारतीय क़ैदी कश्मीर सिंह को मानवीय आधार पर रिहा कर दिया था. कश्मीर सिंह पर भी पाकिस्तान में जासूसी का आरोप था और वो 35 साल से पाकिस्तान की जेलों में सज़ा काट रहे थे. जब पाकिस्तान सरकार से कश्मीर सिंह को क्षमादान देने की अपील की गई थी तो उनकी अपील के साथ सरबजीत की भी क्षमादान याचिका राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को भेजी गई थी. कश्मीर सिंह को तो रिहा कर दिया गया लेकिन सरबजीत सिंह की क्षमा याचिका रद्द कर दी गई. कश्मीर सिंह की रिहाई में अहम भूमिका निभाने वाले पाकिस्तान के मानवाधिकार मामलों के मंत्री अंसार बर्नी ने बीबीसी को बताया कि अगर ये ख़बर सही है तो वे सरबजीत सिंह की मौत की सज़ा को कम कराने के लिए पहल करेंगे. उन्होंने कहा, "मैं मानवाधिकार के आधार पर राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से अपील करूँगा कि सरबजीत सिंह की सज़ा कम कर दी जाए. क्योंकि अगर किसी को उम्र क़ैद भी होती है तो वह 14 साल तक जेल में रहता है. लेकिन सरबजीत तो 18 साल से जेल में हैं." पहल अंसार बर्नी ने कहा कि अगर भारत भी पाकिस्तानी क़ैदियों को छोड़ने की पहल करता है तो इससे अच्छा माहौल बनेगा. उन्होंने कहा कि वे इस सिलसिले में जल्दी ही भारत का दौरा करेंगे.
अंसार बर्नी ने बताया कि कश्मीर सिंह की रिहाई के कुछ दिन बाद ही भारत में एक पाकिस्तानी क़ैदी की मौत हो गई और मीडिया में इस तरह की बातें आई कि क़ैदी को प्रताड़ित किया गया था. उन्होंने कहा, "मैं तो इसकी पुष्टि नहीं कर सकता लेकिन यहाँ की मीडिया ने इस ख़बर का ख़ूब प्रचार किया जिससे नकारात्मक असर पड़ा. थोड़ी मुश्किल भी आई है लेकिन मुझे इसकी परवाह नहीं." यह पूछे जाने पर कि क्या राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ इस मामले पर कुछ करेंगे, अंसार बर्नी ने कहा, "पाकिस्तान में अभी जो हालात हैं, उससे तो मुझे थोड़ा शक है लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि अगर अल्लाह किसी की ज़िंदगी बचाना चाहे तो वह उसे ज़रूर बचा लेता है." दूसरी ओर इस ख़बर के मीडिया में आने के बाद सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाक़ात करने वाली हैं. उन्होंने पाकिस्तान सरकार, मानवाधिकार मामलों के मंत्री अंसार बर्नी और पाकिस्तान की जनता से अपील की कि वे मानवाधिकार के आधार पर इस मामले में पहल करें. |
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