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सरबजीत मामले की समीक्षा की अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में फाँसी का सामना कर रहे भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह के वक़ील ने वहाँ के सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है. सरबजीत सिंह 1990 में लाहौर में तीन बम धमाकों में शामिल होने और भारत के लिए जासूसी करने के आरोप हैं जिनके लिए उसे फाँसी की सज़ा सुनाई गई है. सरबजीत सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी सोमवार को फ़ैसला देते हुए निचली अदालत के फाँसी के ही फ़ैसले को बरक़रार रखा था. सरबजीत के वकील राणा अब्दुल हमीद ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने एक बार फिर पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है जिसमें सरबजीत सिंह के मामले पर फिर से विचार करने की अपील की गई है. राणा अब्दुल हमीद ने बताया कि किसी भी मामले में कोई हुलिया दर्ज नहीं है जो सरबजीत सिंह से मिलता हो और न ही किसी भी रिपोर्ट में कोई गवाह था, अलबत्ता बाद में गवाहों के बयान दर्ज किए गए. वकील ने बताया कि सरबजीत सिंह ने कुछ मामलों में इक़बालिया बयान दे दिए थे और सुप्रीम कोर्ट से यह भी अपील की गई है कि सरबजीत सिंह के बयानों की फिर से समीक्षा की जाए. सुप्रीम कोर्ट से भी कई बार निराशा हाथ लगने के बाद सरबजीत के परिवार ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ से भी माफ़ी की गुहार लगाई है. |
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